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मोबाइल फोन होंगे आपके नए क्लास रूम

मुंबई मोबाइल फोन अब सिर्फ काल करने या सुनने के माध्यम नहीं रह गए हैं, बल्कि चलते-फिरते क्लासरूम बन चुके हैं। एम-र्ल्िनग के तहत उपभोक्ता अपने मोबाइल पर किसी विषय की विस्तृत जानकारी देख, सुन अथवा पढ़ सकते हैं। इसके लिए लैपटाप लेकर चलने की जरूरत भी नहीं।

चौबीस घंटे सीखने का दौर.. :

देश की तमाम कंपनियां ग्राहकों में पकड़ बनाने और संस्थान में कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए इस सेवा का इस्तेमाल कर रही हैं। इसे शिक्षण संस्थानों से जोड़ने की योजना पर भी तेजी से काम चल रहा है।

क्या है एम-र्ल्िनग ? :

साल्यूशन प्रोवाइडर या साफ्टवेयर कंपनियां विभिन्न विषयों पर खास जानकारियों को डिजिटल कंटेंट (सामग्री) में बदलती हैं, जिसे मोबाइल पर डाउनलोड किया जा सकता है। इसके तहत प्रबंधन के सिद्धांत से लेकर उत्पाद व सेवाओं की बारीकियों को मोबाइल पर डाटा, आवाज या वीडियो फार्मेट में उतारा जा सकता है। उपभोक्ता को इसके लिए मात्र एक एसएमएस ही करना होता है।

सेल्स एक्जीक्यूटिव्स को अब ग्राहकों को कंपनी की योजनाओं व उत्पादों के बारे में जानकारी मुहैया कराने के लिए किताबें व ब्रोशर लेकर चलने की जरूरत नहीं। दिक्कत आने पर वे एक एसएमएस भेज कर संबंधित विषय पर जानकारी हासिल कर सकते हैं। कंपनी के उच्च अधिकारी कर्मचारियों को कुशल प्रबंधन का पाठ पढ़ाने के अलावा कंपनी की नीतियों के प्रचार-प्रसार में भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

कौन है मास्टरमाइंड :

२४*७ र्ल्िनग और एनआईआईटी जैसी कंपनियां डाटा को डिजिटल फार्म (रूप) में बदलने का काम कर रही हैं। दोनों ही से करीब तीन-तीन दर्जन कंपनियां सेवाएं ले रही हैं। इनमें एफएमसीजी, फार्मा व आईटी आदि क्षेत्रों की कंपनियां प्रमुख रूप से शामिल हैं।

एनआईआईटी के रस्तोगी को इस उद्योग की विकास दर दो अंकों में दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि मोबाइल का उपभोक्ता आधार २५ करोड़ है, जो तेजी से बढ़ रहा है।

ट्रेनिंग और र्ल्िनग का जरिया

एम-र्ल्िनग का ज्यादातर इस्तेमाल कर्मचारियों के प्रशिक्षण व वरिष्ठ अधिकारियों को कंपनी की चुनौतियों व लक्ष्य से अवगत कराने में हो रहा है। -केएस कार्तिक, सीईओ, 24*7 र्ल्िनग (लाइफस्टाइल मैनेजमेंट कंपनी)

इंटरनेट से बेहतर

एम-र्ल्िनग का सबसे बड़ा प्लस प्वाइंट इसकी मोबिलिटी है। इसके लिए न तो क्लासरूम की जरूरत है, न ही किसी अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर की। यह सीखने-सिखाने के अन्य माध्यमों से सस्ती है।

-विपुल रस्तोगी, वाइस-प्रेसिडेंट इंटरप्राइज र्ल्िनग साल्यूशंस एनआईआईटी





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