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घर-मंदिरों में होगी पूजा

इंदौर. नागपंचमी पर बुधवार को घर-घर में नागदेवता की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाएगी। कई स्थानों पर नागपंचमी मेला भी लगेगा। कुम्हारखाड़ी स्थित प्राचीन नागेश्वर मंदिर में मेला लगेगा।

समिति के अध्यक्ष रमेश पान वाले और संयोजक महेश कश्यप व रमेश कश्यप ने बताया मंदिर में विशेष श्रंगार किया जाएगा। साथ ही भक्तों के लिए विशेष दर्शन की व्यवस्था की जाएगी।

मंदिर परिसर में बाबा अमरनाथ की बर्फ निर्मित रंगीन झांकी भी सजाई जाएगी। रात में भजन-संध्या होगी। युवा मंडल द्वारा सावन पर आधारित भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी। भांगड़ा नृत्य और डांडिये का आयोजन भी होगा।

अतिथियों द्वारा अखाड़ों के उस्ताद, खलीफा और बुजुर्गो का सम्मान भी किया जाएगा। गुटकेश्वरधाम स्थित मंदिर में तीन दिनी मेले का आयोजन किया जाएगा।

इंदौर क्षेत्रीय अहिरवार समाज 11 पंच कमेटी के अध्यक्ष घनश्याम धनोरिया ने बताया मंदिर में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए विशेष व्यवस्था और प्रबंधन किया गया है। बाबा भीलट देव सेवा मंडल द्वारा लोधा कॉलोनी पर नागपंचमी उत्सव मनाया जा रहा है। रात 9 बजे भजन संध्या होगी।

पाबंदी हटाने की मांग की
नवनाथ देवस्थान पंच कमेटी और नाथ सपेरा जाति द्वारा प्रशासन से नागपंचमी पर नाग देवता की पूजा करने पर लगी पाबंदी हटाने की मांग की गई। कैलाश नाथ ने बताया संपेरों के पास इसके अलावा कोई रोजगार नहीं। प्रशासन हमें दूसरा रोजगार भी उपलब्ध नहीं करा रहा है। हम सांपों को पकड़कर उन पर नियंत्रण रखते हैं।

पूर्णिमा पर ग्रहण और भद्रा, नागपंचमी पर होंगे कई जगह आयोजन

सावन माह में होने वाला श्रावणी उपाकर्म इस बार पूर्णिमा पर ग्रहण और भद्रा नक्षत्र होने की वजह से नागपंचमी पर किया जाएगा। बुधवार को शहरभर में कई स्थानों पर सामूहिक श्रावणी उपाकर्म होगा। यज्ञोपवित धारण किए हुए लोग श्रावणी उपाकर्म करेंगे, जनेऊ बदलेंगे। एरोड्रम रोड स्थित श्रीश्री विद्याधाम में बुधवार को सुबह 10 बजे श्रावणी उपाकर्म होगा।

विद्याधाम के ट्रस्टी पं. दिनेश शर्मा ने बताया सुबह 10 बजे वैदिक मंगलाचरण और संकल्प के साथ इसकी शुरुआत होगी। इसमें स्वामी गिरिजानंद सरस्वती वेदवेदांग विद्यापीठ के विद्यार्थी आचार्यगण एवं श्रद्धालु शामिल होंगे। श्रावणी उपाकर्म पं. राजेश शर्मा के आचार्यत्व में संपन्न होगा।

गंभीर नदी के तट पर होगा उपाकर्म
धार रोड पर गंभीर नदी के तट (धरावराधाम के पास) महंत घनश्यामदास महाराज के सान्निध्य में श्रावणी उपाकर्म होगा। घनश्यामदास संस्कृत विद्यापीठ के ब्राम्हण और अन्य लोग शामिल होंगे।

संकल्प लिए जाएंगे
पं. आनंदशंकर व्यास ने बताया नियम के अनुसार नदियों, बावड़ियों या तालाब के आसपास उपाकर्म किया जाता है। जनेऊ धारण करना हिंदू समाज में प्रमुख संस्कार माना जाता है इसलिए इसे बदलने का उपाकर्म और महत्वपूर्ण हो जाता है। इस नियम में देवी-देवताओं, ऋषियों और पितरों के नाम के संकल्प लिए जाते हैं। सालभर में अनजाने में हुए पापों के लिए क्षमा मांगी जाती है।

हर वर्ष ब्राम्हणों द्वारा जनेऊ परिवर्तित किया जाना जरूरी है, जिसे श्रावणी उपाकर्म कहा जाता है। यजुर्वेदी और सामवेदी अलग-अलग अवसर पर इस उपाकर्म को करते हैं। यजुर्वेदी जहां सावन की पूर्णिमा पर ये उपाकर्म कई नियमों के साथ करते हैं वहीं सामवेदी हरितालिका तीज और जन्माष्टमी पर ये संस्कार करते हैं। इस बार शहर में कई जगह ये आयोजन नागपंचमी पर हो रहा है क्योंकि पूर्णिमा के दिन ग्रहण है।

पंचगव्य से स्नान होगा
गुर्जर गौड़ ब्राम्हण समाज के सत्यनारायण शर्मा ने कहा गौतम आश्रम एरोड्रम रोड पर इस बार करीब 50 लोग सामूहिक रूप से इस आयोजन में भाग ले रहे हैं। यहां पर विधि-विधान से स्नान किया जाएगा।





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