नई दिल्ली.सुप्रीम कोर्ट ने स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) पर प्रतिबंध हटाने के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। दिल्ली हाईकोर्ट की विशेष ट्रिब्यूनल ने मंगलवार को सिमी पर पाबंदी जारी रखने की केंद्र सरकार की अधिसूचना को खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र की अपील को स्वीकार करते हुए सिमी को नोटिस जारी किए हैं। मामले की सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी।
शीर्ष कोर्ट का यह फैसला सिमी पर पाबंदी जारी रखने के समर्थन में ट्रिब्यूनल को पुख्ता सबूत न दे पाने के आरोपों का सामना कर रही केंद्र सरकार के लिए बड़ी राहत है। मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने तो केंद्र पर सिमी के खिलाफ पर्याप्त सबूत न जुटा पाने में अक्षमता का आरोप लगाते हुए गृह मंत्री शिवराज पाटील की बर्खास्तगी की मांग की है।
दिल्ली हाईकोर्ट की विशेष ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ एडीशनल सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम ने चीफ जस्टिस केजी बालकृष्णन नीत बेंच के समक्ष याचिका दायर की। सुब्रमण्यम ने सिमी को एक आतंकवादी संगठन बताते हुए कहा कि गुजरात और बेंगलूर में हुए हाल के धमाकों के लिए यही संगठन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि अगर ट्रिब्यूनल के फैसले पर रोक नहीं लगी तो आतंकवाद के खिलाफ देश के अभियान को अपूर्णनीय क्षति हो सकती है।
हालांकि शीर्ष कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले पर पहले यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया था, लेकिन सरकारी वकील के यह कहने पर कि इससे सिमी को देशद्रोही गतिविधियों की इजाजत मिल जाएगी, बेंच ने अंतरिम रोक पर सहमति जताई।
सिमी पर सियासत यूपीए सरकार के दो समर्थक दलों, राजद और सपा ने सिमी पर प्रतिबंध हटाने के ट्रिब्यूनल के फैसले का स्वागत किया है। दोनों दलों ने जहां फैसले को न्यायोचित बताया है, वहीं भाजपा प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने इसके लिए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया।
रूडी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कहीं उन्होंने विश्वास मत पर समर्थन के एवज में सपा के साथ सिमी को आजाद करवाने की डील तो नहीं की थी।’ रूडी ने यह भी कहा कि मुलायम ही वह नेता हैं, जिन्होंने उत्तरप्रदेश में अपने मुख्यमंत्रित्व काल में सिमी पर पाबंदी हटाई थी। ।