इंदौर. उद्घाटन के बाद पहली बार चली इंदौर-उदयपुर ट्रेन में सवार लोगों में काफी उत्साह था। ये ट्रेन अब सप्ताह में तीन दिन नियमित रूप से चलेगी। पहले दिन सामान्य कोच तो फुल थे लेकिन एसी और स्लीपर की कई सीटें खाली रहीं।
ट्रेन में सवार होने के लिए सुबह साढ़े सात बजे से ही लोगों की आवाजाही शुरू हो गई। ट्रेन के सामान्य कोच में उदयपुर के अलावा उज्जैन, नागदा, नीमच, मंदसौर, चित्तौड़गढ़ के लोग सवार थे। उदयपुर निवासी एस.एस. बाफना और कांता बाफना ने कहा इंदौर रिश्तेदारों से मिलने आए थे। पता चला कि ट्रेन बुधवार को इंदौर से चलेगी तो रुक गए।
उदयपुर के शेखर बनेरिया ने बताया मैंने बायपास करवाई है, बस में आने-जाने में परेशानी होती थी, इसलिए उदयपुर से अहमदाबाद जाकर शांति एक्सप्रेस से इंदौर में रिश्तेदारों से मिलने आता-जाता था। उन्होंने कहा अब इस ट्रेन से उदयपुर की राह काफी आसान हो गई। पलासिया निवासी छगनलाल नागर ने बताया वे परिवार के 10 लोगों के साथ रिश्तेदारों से मिलने उदयपुर जा रहे हैं। उन्होंने कहा बस से जाते थे तो 400 रुपए लगते थे, सड़कें खराब होने से परेशानी भी होती थी। अब किराया भी आधा हो गया और सफर भी काफी अच्छा होगा।
.. और लगा कि ट्रेन निकल गई
उदयपुर से ट्रेन सुबह 6.50 की जगह 7.30 बजे इंदौर आई। प्लेटफार्म 4 पर ट्रेन खड़ी होने से सामान्य कोच में सवार होने वाले लोगों ने तो वहां पर ही अपनी सीट रोक ली थी। इसके बाद करीब 8 बजे ट्रेन शटिंग के लिए निकल गई तो कई यात्री प्लेटफार्म पर ही खड़े रह गए, उन्हें लगा ट्रेन निकल गई। इसके बाद प्लेटफार्म नं. 5 पर ट्रेन आई, तब जाकर अन्य यात्री सवार हुए। ट्रेन तय समय से 25 मिनट लेट सुबह 8.30 बजे रवाना हुई।
ट्रेन में लगे रिजर्वेशन चार्ट में सेकंड ए.सी. में 10, थर्ड ए.सी. में 30 और स्लीपर के सात शयनयान में क्रमश: 30-35 लोगों के रिजर्वेशन आरक्षित थे। हालांकि रेलवे के अधिकारियों के अनुसार यह इंदौर से सवार हुए लोगों के आरक्षण की स्थिति है। जिस-जिस स्टेशन से ट्रेन रवाना होगी, वहां से भी लोगों के आरक्षण हैं वे भी इसमें सवार होंगे।