इंदौर. मुख्यमंत्री से मारुति वैन की चाबी लेते वक्त युवा बेरोजगारों को अहसास नहीं था कि यह पांच महीने तक बेकार खड़ी रहेगी।
अफसरों ने उस पर परमिट का ऐसा ब्रेक लगाया कि लेने वालों को बोझ लगने लगी है। उसे न सिटी वैन की तरह चला पा रहे हैं, न किस्तें भर पा रहे हैं। यह पीड़ा मुख्यमंत्री को भी सुनाई लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
मुख्यमंत्री ने मार्च में भोपाल में आयोजित समारोह में अंत्यावसायी योजना के तहत एक करोड़ रुपए के ऋण बांटे थे जिसमें इंदौर के नौ बेरोजगारों को वैन मिली थी लेकिन अभी तक नंबर और परमिट नहीं मिले।
किस्तों के लिए कर्ज
वैन मिलने के अगले ही महीने साढ़े पांच हजार रुपए मासिक किस्त शुरू हो गई। पांच महीने से वैन नहीं चलने के कारण किस्त के लिए भी कर्ज लेना पड़ रहा है। वैन मालिक सरदारसिंह कायस्त ने बताया कई लोग तो एक किस्त भी नहीं भर पाए।
कर्ज लेकर चुकाए थे नकद
संतोष खत्री, राजू वर्मा, सरदारसिंह कायस्त, विक्रम रामचरण, कैलाश नागूलाल, संतोष कुमार, दिनेश कल्याणो, नवीन कुमार और अजय जयराम से वैन के लिए 21 हजार रुपए लगभग डाउन पेमेंट (नकदी) दिया था। वह रकम भी किसी ने उधार ली, तो किसी ने सामान बेचा।
सभी के हाथ जोड़े
वैन मालिक राजू वर्मा ने बताया चाबी मिलने के बाद संभागायुक्त से लेकर कलेक्टर और आरटीओ तक के हाथ जोड़े। संभागायुक्त ने 20 जून को कलेक्टर व आरटीओ को पत्र भी लिखा, लेकिन नंबर तक नहीं मिले। 23 मई को मुख्यमंत्री को सांवेर में गाड़ी दिखाकर परमिट व नबंर की समस्या बताई थी। अफसरों ने फटाफट नोट भी की लेकिन फिर सब ठंडे बस्ते में चला गया।
ग्रामीण रूट के परमिट दे सकते हैं- आरटीओ
परमिट क्यों नहीं जारी किए?
- शहर में पहले से बहुत सी सिटी वैन चल रही हैं। ऐसे में नए परमिट देने से लोड और बढ़ जाएगा। अंत्यावसायी योजना में भी स्पष्ट नहीं किस रूट के लिए परमिट देना है।
अंत्यावसायी नियम कौन स्पष्ट करेगा?
- मुझे जानकारी नहीं, शासन से पूछेंगे।
वैन मालिकों का क्या होगा?
- वे दो दिन पहले मिले हैं। उन्हें ग्रामीण रूट के परमिट दिए जा सकते हैं लेकिन वे सिटी परमिट चाहते हैं। इसके लिए कलेक्टर से चर्चा करना होगी।
तत्काल देंगे परमिट
कलेक्टर राकेश श्रीवास्तव ने बताया वैन मालिकों की समस्या की जानकारी मुझे नहीं थी। आरटीओ को नंबर और परमिट तत्काल जारी करने के लिए कहूंगा।