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अजमेर. राज्य सरकार ने सभी निगम, बोर्ड और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों को गिफ्ट देने पर पाबंदी लगा दी है। सरकार ने निर्देश जारी किए हैं कि वे ही निगम, बोर्ड आदि गिफ्ट दे सकेंगे, जो पहले से परंपरागत रूप से देते रहे हैं। इसमें भी 500 रुपए तक का ही गिफ्ट दिया जा सकेगा।
स्टेट एंटरप्राइजेज विभाग के प्रमुख शासन सचिव अशोक संपतराम ने सभी निगम, बोर्ड और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को परिपत्र जारी कर हिदायत दी है कि सरकार ने गिफ्ट आदि देने की परंपरा को रेस्पर एक्ट के दायरे में ले लिया है।
प्रमुख शासन सचिव ने विभागों को निर्देश जारी किए हैं कि वे ही निगम, बोर्ड या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम अपने कर्मचारियों को गिफ्ट दे सकेंगे, जो परंपरागत तरीके से गिफ्ट देते रहे हैं। इसका दायरा भी सीमित कर दिया गया है।
ऐसे निगम 500 रुपए से ज्यादा का गिफ्ट नहीं दे पाएंगे। इसके लिए भी सरकार से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। जो निगम बोर्ड आदि गिफ्ट देते रहे हैं वे गिफ्ट देने का प्रस्ताव पारित करवाएंगे और फिर अनुमति के लिए राज्य सरकार को भेजेंगे।
क्यों उठाना पड़ा कदम..
राज्य सरकार को यह कदम हाउसिंग बोर्ड की ओर से दिए जा रहे गिफ्ट के कारण उठाना पड़ा। बोर्ड ने गठन के 25 वर्ष पूरे होने अपने कर्मचारियों को गिफ्ट दिए थे। इसे देखते हुए अन्य निगमों की ओर से भी मांग उठने लगी थी।
शिक्षा बोर्ड पर प्रभाव
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अपने कर्मचारियों को स्थापना के स्वर्ण जयंती वर्ष पर गिफ्ट देने पर विचार कर रहा है। बोर्ड का स्वर्ण जयंती वर्ष हालांकि निकल चुका है। हाल ही में एक अगस्त को बोर्ड ने 52वां स्थापना दिवस मनाया है।
बोर्ड कर्मचारी पूर्व में विशेष इंक्रीमेंट की मांग कर रहे थे, जो अब गिफ्ट की मांग में तब्दील हो चुकी है। बोर्ड में चूंकि कर्मचारियों को गिफ्ट देने की कोई परंपरा नहीं है, इसलिए 500 रुपए तक के गिफ्ट भी बोर्ड नहीं दे पाएगा।