Manoranjan
Cinema
Bollywood Bollywood मुंबई.
पहले आमिर ने अपने ब्लॉग के माध्यम से अपने आप को बड़ा साबित करने का प्रयास किया। इधर क्या आप पांचवीं पास से तेज हैं और दस का दम को लेकर शाहरुख और सलमान आपस में पार्टी में भिड़ गए ।अक्षय कुमार की फिल्मों की सफलता से शाहरुख खान को लगा कि उनकों वास्तव में तगड़ी चुनौती मिल रही है तो उन्होनें कई सार्वजनिक फिल्म समारोह में अक्षय का मजाक उड़ाने का प्रयास किया। सबसे बड़ी बात शाहरुख और अमिताभ बच्चन में लंबे समय से अघोषित छाया युद्ध चल रहा है जिसे दोनों ही बड़े कलाकार शालीनता से इंकार करते हैं। और इस जंग में अब अक्षय कुमार ने आग में घी डालने का काम किया है।
आज बॉलीवुड एक अदद हिट फिल्म को तरस रहा है वहीं ये सितारें अपने आपको बॉक्स ऑफिस का सुपर सितारा साबित करने की होड़ में दिखलाई पड़ते हैं लेकिन सुपर स्टार की छवि से सभी दूर लगते है खुद बिग बी भी अपने पुराने दिनों की तुलना में काफी फीके जान पड़ते है। आज अमिताभ बच्चन का किसी और से नहीं खुद की छवि से मुकाबला है। शोले,दीवार और जंजीर जैसी फिल्मों के सुपर सितारें की तुलना रामगोपाल वर्मा की आग और निशब्द जैसी फिल्मों से करना ही बेमानी है। इसमें कोई शक नहीं कि वे बड़े सितारे हैं और इस उम्र में भी जिस तरह से युवा सितारों के बीच में कुछ नया कर रहें है वह किसी भी युवा सितारें के लिए बहुत कुछ सीखने की पाठशाला की तरह है।
शायद अक्षय इस पाठशाला के अच्छे छात्र हैं और उन्होंने अपने आप को साबित भी किया है। वे बड़ों का आदर करने में न केवल औरों से आगे हैं बल्कि एक साल में 5 से अधिक फिल्मों को सुपरहिट कराने का दम रखते है वह भी अपने दम पर। लेकिन इस सफलता की तुलना राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन के दौर से तुलना करना ही बेमानी हैं। वह दौर कुछ और था यह दौर कुछ और हैं।आज दर्शक सिनेमा हॉल में अपने तनाव को दूर करने के लिए जाता है और उस समय इन दो महानायकों की सितारा छवि का आकर्षण दर्शक को सिनेमा हॉल की तरफ खींच कर लाता था।
रितिक रोशन की पहली फिल्म की सफलता के बाद राकेश रोशन ने कहा था कि सिनेमा प्रेमियों का ऐसा प्रेम कभी राजेश खन्ना की फिल्मों को मिला करता था और रितिक रोशन को ऐसी कई सफलताएं देने के लिए कठिन मेहनत करनी होगी। उनको उभरता हुआ महानायक माना गया लेकिन उनसे जितनी उम्मीद थी उस पर वे कामयाब नहीं हो सके। दरअसल रितिक रीयल सुपर सितारा बनने का दम रखते है लेकिन फिलहाल वो भी बहुत पीछे है और उनको भी सफलता के लिए राकेश रोशन जैसे निर्देशक की जरूरत पड़ती है।
कुछ दिन पहले कहा जाता था कि बॉक्स ऑफिस पर या तो शाहरुख खान बिकता है या फिर सेक्स। कुछ हद तक बात में दम था लेकिन जब फिल्म में कहानी ना हो तो सेक्स और आयटम सांग की जरूरत पड़ती ही है। लेकिन इससे फिल्म हिट तो कराई जा सकती है पर आप महानायक नहीं बन सकते। शाहरुख आज जहां है उसमें उनकीं अपनी मेहनत हैं लेकिन यह आने वाला समय तय करेगा कि क्या वे राजेश खन्ना और बिग बी के असली वारिस ?
2008 में गिनती की 5 से 6 फिल्में ही बॉक्स ऑफिस पर हिट हो पाई हैं और लगभग इतने ही नायकों के बीच सुपरस्टार होने की होड़ है। दरअसल बेदम पठकथा,आधुनिकता के नाम पर शोर मचाते संगीत में नायक कहीं खो गया है और कट कॉपी पेस्ट की भेड़चाल में हर कोई पैसा बनाने की होड़ में दिखता है। ऐसे में महानायक की तलाश करना ही बेमानी है। बॉलीवुड और भारतीय समाज बेशक एक महानायक की तलाश कर रहा हो लेकिन यह एक कड़वी हकीकत है कि हमारे समाज और बॉलीवुड से रीयल सुपर सितारा कहीं खो गया है जिसे हम सब खोज रहे हैं। हमारे सामने जो चल रहा है वह छवियों का महायुद्ध है जिसे एक महानायक ही तोड़ सकता है और इसके लिए हमें अभी कुछ दिन और इंतजार करना पड़ेगा।
आपकी नजर में बॉलीवुड पर आज किस सितारे का राज चल रहा है?शाहरुख और अक्षय कुमार के बीच किंग बनने की जंग पर अपने विचार हमें लिख भेजें .
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