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वकील से खफा हो जज ने केस छोड़ा

नई दिल्ली.गाजियाबाद पीएफ घोटाले की सीबीआई जांच के लिए दायर याचिका पर वीरवार को सुनवाई ने तब नाटकीय मोड़ ले लिया जब सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच के प्रमुख जस्टिस बीएन अग्रवाल ने सुनवाई से खुद को हटा लिया। याचिकाकर्ता ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की ओर से पेश वकील व पूर्व केंद्रीय विधि मंत्री शांति भूषण की टिप्पणी अवमाननाजनक पाए जाने पर जस्टिस अग्रवाल ने यह निर्णय लिया।

टिप्पणी वापस लेने को कहा

नाटकीय घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जस्टिस अग्रवाल ने भूषण के इस आरोप पर कड़ी आपत्ति जताई कि सुप्रीम कोर्ट भ्रष्ट जजों का बचाव कर रही है। जज ने भूषण से टिप्पणी वापस लेने को कहा, लेकिन भूषण अड़े रहे। उन्होंने कहा,‘योर लार्डशिप मेरे विरुद्ध अवमानना प्रकिया शुरू की जा सकती है। मैं आरोप पर कायम हूं।’

भूषण ने मांगी माफी

इसके बाद जस्टिस अग्रवाल ने कहा, ‘यदि एक पूर्व विधि मंत्री और प्रमुख न्यायविद ऐसे आरोप लगा रहा है तो हम मामले की सुनवाई नहीं करेंगे।’ कम से कम मैं सुनवाई छोड़ता हूं। मैं इसे आदेश में दर्ज करूंगा। उन्होंने भूषण से कहा, ‘आप वकील की तरह व्यवहार नहीं कर रहे हैं।’ इसके बाद भूषण ने माफी मांगकर टिप्पणी वापस ली और सुनवाई फिर शुरू हुई।

फिर तीखी बहस

हालांकि जजों की पुलिस पूछताछ को लेकर जस्टिस अग्रवाल और भूषण के बीच फिर बहस हो गई। दोनों की बहस के दौरान भूषण के पुत्र प्रशांत ने हस्तक्षेप करते हुए जस्टिस अग्रवाल से कहा, ‘योर लार्डशिप अपने शब्द वरिष्ठ अधिवक्ता (शांति भूषण) के मुंह में रख रहे हैं।’ हालांकि प्रशांत ने बाद में माफी मांगकर टिप्पणी वापस ले ली, लेकिन जस्टिस अग्रवाल ने सुनवाई से खुद को हटा लिया। वे चीफ जस्टिस के बाद सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जज हैं। हालांकि बेंच के अन्य दो जज जस्टिस वीएस सिरपुरकर और जीएस सिंघवी मौन रहे। उन्होंने सुनवाई से हटने का कोई संकेत नहीं दिया। बेंच ने यह मामला चीफ जस्टिस केजी बालकृष्णन को नई बेंच गठित करने के लिए ट्रांसफर कर दिया है। चीफ जस्टिस शांति भूषण द्वारा आपत्ति जताने के बाद पहले ही सुनवाई से हट चुके हैं।

सात करोड़ के घोटाले का है मामला

गाजियाबाद में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के भविष्य निधि खाते से ट्रेजरी अधिकारी आशुतोष अस्थाना ने सात करोड़ रुपए निकाले थे। यह मामला 2001 से 2008 के बीच का है। इस घोटाले में कथित रूप से सुप्रीम कोर्ट के एक जज सहित कई अन्य जजों के लाभान्वित होने का आरोप है। स्थानीय बार एसोसिएशन मामले की जांच के साथ दोषी जजों पर मुकदमा चलाना चाहता है। मामले में दायर तीन याचिकाओं में से एक ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की है।





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