इंदौर. 08-08-08 यानी आठ अगस्त 2008, यही वह तारीख है जिसका योग शताब्दी के बाद आया है। अंकों के इस विशिष्ट संयोग को ज्योतिषि भी शुभ मानते हैं।
ज्योतिषि डॉ. ललित सोनी इसे दो तरह से जोड़ते हैं। तीन बार आठ का योग 24 होता है जो आध्यात्मिक महत्व का है। जैसे 24 घंटे, 24 कुंडीय यज्ञ, गायत्री मंत्र के 24 अक्षर, एक वर्ष में 24 पक्ष (12 कृष्ण व 12 शुक्ल पक्ष), सूरज की 24 किरणों, शरीर के 24 केंद्र और भगवान विष्णु के 24 अवतार-सनतकुमार, वराह, नारद, नरनारायण, कपिल, दत्तात्रय, यज्ञपुरुष, ऋषभ, पृथु, मत्स्य, कूर्म, धन्वन्तरी, मोहिनी, नृसिंह, वामन, परशुराम, व्यास, हंस, राम, कृष्ण, हयग्रीव, हरि, बुध और कल्कि (जो आनेवाला है) माने जाते हैं।
इसी तरह 08-08-2008 लिखकर जोड़ें तो 26 आता है जिसका मूलांक भी आठ होगा। इस योग से अर्थ, तांबे व लोहे में मंदी रहेगी जबकि बैंकिंग की राष्ट्रीय नीति पर रचनात्मक प्रभाव पड़ेगा। देश में दुर्घटनाएं बढ़ेंगी। इस दिन पैदा होने वाले बच्चे वैभवशाली और तीक्ष्ण बुद्धि वाले होंगे।
8 महीने में तलाशा 080808 नंबर का नोट
तेल व्यापारी ब्रजेश तलाटी के पास आठ नंबर के संयोग वाले कई दुर्लभ नोट हैं। 080808 अंक वाला नोट तलाशने में तो उन्हें आठ महीने से ज्यादा लगे। उनके संग्रह में सात अंक वाले नोट के साथ 111786 का सौ रुपए का नोट भी है। वे बताते हैं 111 हिन्दु धर्म में शुभ माना जाता है जबकि 786 मुस्लिम धर्म में। एक से लेकर एक हजार रुपए के नोटों के संग्रह में 000008, 000888, 088888 तथा 888888 नंबर के नोट शामिल हैं। अब वे 09-09-09 नंबर के नोट जुटाने में लगे हैं।
जापानी व चीनी ज्योतिष में भी शुभ
हरिद्वार के पं. रामचरण शुक्ल के मुताबिक यह तारीख अंग्रेजी कैलेंडर के साथ भारतीय वैदिक गणना के आधार पर भी शुभ संकेत दे रही है। जापानी व चीनी ज्योतिष में भी आठ शुभ अंक माना गया है। इसी दिन मंगोलिया के पौराणिक विष्णु मंदिर में आठ हजार जोड़े गृहस्थ जीवन में प्रवेश करेंगे।
आठ का विशेष महत्व
भारतीय जीवन दर्शन में भी आठ का विशेष महत्व है।
आठ दोष- आलस्य, निंद्रा, स्वाद, मन, बुद्धि, हठ, काम, क्रीड़ा, महाचिंता
आठ सिद्धियां- अणिमा, गरिमा, महिमा, लधिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशत्व, वशित्व
आठ धातु - चांदी, सोना, तांबा, पीतल, लोहा, सीसा, कांसा, रांगा,
अष्टछाप के कवि- सूरदास, कृष्णदास, परमानंददास, कुभ्भनदास, चतुर्भुदास, छीतस्वामी, गोविन्ददास, नंददास
आठ अंग योग के- यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि
आठ कर्म- खाना, पीना, सोना, जागना, सन्तानोत्पत्ति, शत्रुसंक्षरण, जन्म, मरण
आठ प्रमुख दिशाएं- पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, अग्नि, वायव्य, ईशान, नैऋत्य