HomeNewsNational National

तसलीमा भारत पहुंची, फिर अज्ञात स्थान पर

नई दिल्ली.विवादास्पद बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन शुक्रवार सुबह अचानक भारत पहुंचीं। यहां इंदिरा गांधी एअरपोर्ट पर उतरते ही सुरक्षा एजेंसियां उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर ले गई हैं।

अपनी आत्मकथा ‘द्विहोन्दितो’ (दो हिस्सों में) के कुछ विवादित अंशों पर मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा आपत्ति जताए जाने के बाद तसलीमा को इस साल मार्च में भारत छोड़कर स्वीडन जाना पड़ा था।

1993 में लिखे उपन्यास ‘लज्जा’ से विवादों में र्आई तसलीमा (45) ने अपने भारत आने का मकसद नहीं बताया है। भारत में उनके वीजा की अवधि 12 अगस्त को खत्म हो रही है। तसलीमा हालांकि भारत सरकार से स्थायी नागरिकता की मांग करती आ रही हैं, लेकिन अभी इस संबंध में कोई फैसला नहीं लिया गया है।

भारत मेरी जिंदगी :

स्वीडन में अपने चार माह के प्रवास के दौरान तसलीमा ने अपनी वापसी की घोषणा करते हुए कहा था कि हमेशा के लिए भारत से जुदा होना उनके लिए मौत के समान होगा। ‘द्विहोन्दितो’ को लेकर विवाद पैदा होने के बाद तसलीमा को पिछले साल नवंबर में पश्चिम बंगाल से पहले जयपुर और फिर कुछ दिन तक दिल्ली में किसी अज्ञात स्थान पर रखा गया था। इस साल 18 मार्च को उन्होंने अपने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए भारत छोड़कर स्वीडन जाने की घोषणा की थी।

वतन से दूर :

खुद को महिलावादी लेखिका बताने वालीं तसलीमा 1994 में बांग्लादेश छोड़ने के बाद से लगातार निर्वासित जिंदगी गुजार रही हैं। वे बांग्लादेश की नागरिक तो हैं, पर उनका पासपोर्ट बांग्लादेशी अधिकारियों ने जब्त कर रखा है। उन्हें स्वीडन की नागरिकता भी हासिल है। भारत में तसलीमा को पश्चिम बंगाल में रहना खूब रास आता है, क्योंकि वहीं वे अपनी मातृभाषा बांग्ला बोल सकती हैं।

परिचय :

- जन्म : 25 अगस्त 1962, मैमनसिंह पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश)

- शिक्षा : डॉक्टर ऑफ मेडिसिन, मैमनसिंह मेडिकल कॉलेज

- लेखन की शुरुआत 1980 से

- पहला चर्चित उपन्यास- लज्जा (1993 में)

- तसलीमा फिलहाल अपनी आत्मकथा पर केंद्रित छठी किताब ‘नई किछू नेई’ लिख रही हैं।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: