कोलंबो.
स्पिनर अजंथा मेंडिस के तिलिस्म को तोड़ना भारतीय बल्लेबाजों के लिए दूरी की कौड़ी साबित हो रहा है। सीरीज की शुरुआत से ही मेंडिस की बलखाती गेंदों के आगे नाच रहे टीम इंडिया के दिग्गज बल्लेबाज तीसरे और अंतिम टेस्ट के पहले दिन शुक्रवार को इस स्पिनर के आगे फिर नतमस्तक हो गए।
अपना पहला टेस्ट खेल रहे तेज गेंदबाज धम्मिका प्रसाद के शुरुआती तूफान में शीर्ष क्रम के ढहने के बाद भारतीय पारी मेंडिस के स्पिन जाल में फंसकर महज २४९ रन पर सिमट गई। जवाब में श्रीलंका ने दिन का खेल खत्म होने तक म¨लडा वर्णपुरा का विकेट खोकर १४ रन बना बनाए। माइकल वेंडोर्ट तीन और चा¨मडा वास बिना कोई रन बनाए क्रीज पर डटे हुए थे। वर्णपुरा को ईशांत ने बोल्ड करके भारत को पहली सफलता दिलाई। प्रसाद ने सुबह के सत्र में अपनी तेजी से वीरेन्द्र सहवाग (२१), द्रविड़ (१क्) और सचिन (6) जैसे बल्लेबाज को पेवेलियन की राह दिखाकर भारत को लंच से पहले ही बैकफुट पर ला दिया।
मेंडिस ने इसके बाद गंभीर (७२), लक्ष्मण (२५), पाíथव पटेल (१३), कुंबले एक और जहीर खान को ३२ रन पर आउट करके भारतीय पारी को मामूली स्कोर पर समेट दिया। मेंडिस ने कुल ५६ रन देकर पांच विकेट झटके और सीरीज में अपने शिकारों की संख्या २३ तक पहुंचा दी। यह तो भला हो पुछल्ले बल्लेबाजों जहीर खान और ईशांत शर्मा का जिन्होंने अंतिम विकेट के लिए बेशकीमती ५१ रन जोड़कर टीम का स्कोर ढाई सौ के नजदीक पहुंचाया।
जहीर ३२ रन बनाकर भारतीय पारी में तीसरे सबसे बड़े स्कोरर रहे। ईशांत ने नाबाद १७ रन बनाए। यह एक संयोग ही है कि भारत के पहले और आखिरी विकेट के लिए ५१-५१ रन की साझेदारियां हुईं। इससे पहले प्रसाद ने भारत की तेज शुरुआत की चमक को फीका कर दिया।
उनके प्रयास का ही नतीजा था कि भोजनावकाश के समय तक भारत ने अपनी पहली पारी में तीन विकेट १क्४ रन पर गंवा दिए थे। गंभीर ने दूसरे टेस्ट में दिखाई गई फार्म को यहां भी जारी रखते हुए अपनी अर्धशतकीय पारी में १क् चौके लगाए। भारत और श्रीलंका के बीच जारी तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में इस समय दोनों टीमें १-१ की बराबरी पर हैं। भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला लिया। ओपनर सहवाग और गंभीर ने भारत को तेज शुरुआत दिलाई। दोनों ने पहले विकेट के लिये ५१ रन जोड़े।
श्रीलंकाई क्षेत्ररक्षकों ने भी शुरुआत में कई कैच छोड़े। म¨लडा वर्णपुरा ने चा¨मडा वास की गेंद पर शॉर्ट स्क्वायर लेग पर सहवाग का कैच छोड़ दिया। उस समय सहवाग १४ रन बनाकर खेल रहे थे। इसके अलावा प्वाइंट क्षेत्र में फी¨ल्डग कर रहे तिलकरत्ने दिलशान ने भी सहवाग को रन आउट करने का आसान मौका गंवा दिया। हालांकि प्रसाद ने आखिरकार सहवाग को २१ रनों विकेटकीपर प्रसन्ना जयवर्धने के हाथों कैच आउट कराया। इसके बाद प्रसाद ने श्रीलंका को द्रविड़ और सचिन के रूप में दो और बड़ी कामयाबियां दिलाईं।
द्रविड़ को मैदान पर खड़े अंपायर ने आउट नहीं दिया था। श्रीलंकाई कप्तान माहेला जयवर्धने ने रेफरल सिस्टम का इस्तेमाल किया, जिसमें तीसरे अंपायर ने द्रविड़ को पगबाधा आउट करार दिया। सचिन को प्रसाद की इन¨स्वग गेंदबाजी पर पगबाधा आउट दे दिया गया था। सचिन ने इसके खिलाफ रेफरल प्रणाली का सहारा लिया मगर फैसला उनके पक्ष में नहीं रहा। नाजुक हालात में बल्लेबाजी करने आए गांगुली (35) ने तेज शुरुआत की। वह फार्म में आते दिख रहे थे मगर ऑफ स्पिनर मुथैया मुरलीधरन ने उन्हें १५१ के कुल स्कोर पर कप्तान माहेला जयवर्धने के हाथों कैच आउट करा दिया।
स्कोर में अभी पांच रन ही जुड़े थे कि गंभीर मेंडिस का पहला शिकार हो गए। मेंडिस ने उन्हें पगबाधा आउट किया। लंबे समय बाद टीम में वापसी करने वाले विकेटकीपर बल्लेबाज पाíथव पटेल और लक्ष्मण ने उसके बाद श्रीलंकाई टीम को जल्द ही कोई और विकेट नहीं लेने दिया। दोनों बल्लेबाज स्कोर को १९क् तक ले गए, लेकिन इसी स्कोर पर लक्ष्मण मेंडिस की बेहतरीन गेंद पर स्टंप आउट हो गए।
उसके बाद तो तू चल मैं आया वाली कहानी शुरू हो गई और भारत ने आठ रन के अंदर पटेल १३ कुंबले क्१ और हरभजन क्३ के रूप में अपने तीन और विकेट गंवां दिए इसके बाद ईशांत और जहीर ने अप्रत्याशित बल्लेबाजी करते हुए भारत की डगमगाती नैय्या को सहारा दिया। जहीर ने तीन चौके और एक छक्का लगाकर टीम के लिए महत्वपूर्ण ३२ रन जोड़े जबकि ईशांत 17 रन पर नाबाद रहे।