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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior पिछोर/शिवपुरी. बरसात के पानी के सेवन के कारण पिछोर अनुविभाग के आदिवासी बाहुल्य मजरों में बीमारियां पनप रही हैं। हाल ही में तहसील के गांव महेशपुरा के आदिवासी मजरे भंवरहार में तीन बच्चों की मौत हो चुकी है, बावजूद इसके प्रशासन और स्वास्थ्य महकमा नहीं चेता है और इन आदिवासी मजरों में बच्चे, महिलाएं व पुरुष विभिन्न बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।
पिछोर में कार्यरत मानव अधिकार फोरम ने तहसील के 24 आदिवासी मजरों का सर्वेक्षण कर दावा किया है कि इन मजरों में 308 महिला, पुरुष और बच्चे बुखार, उल्टी दस्त, फोड़े-फुंसी, पेट दर्द, चक्कर कमजोरी आदि बीमारियों के शिकार हैं। आदिवासियों ने अपने तरीके से प्राइवेट चिकित्सकों (झोलाछाप) से इलाज तो कराना शुरू कर दिया है, लेकिन कई अब भी गंभीर बीमार हैं और इनमें 23 फीसदी उल्टी दस्त के मरीज हैं। खैरवास पंचायत के मजरे कोटरा में 25-30 आदिवासी परिवार निवास करते हैं, जहां एक माह से कई लोग बीमारियों से से जूझ रहे हैं। यहां कुल 29 मरीज हैं।
फोरम के सदस्यों का कहना है कि सरकारी मदद के नाम पर बीमारों और मौत का शिकार हुए बच्चों के परिजनों को धेला भी नहीं मिला है। हालांकि इन गांवों में डाक्टरों के वाहन पहुंचे हैं, लेकिन किसी को सरकारी इमदाद नहीं दी गई। सहरिया वर्ग के हित में कार्य करने वाली समाजसेवी संस्था के सदस्य सुगन मेहता का कहना है कि गंभीर रूप से बीमार लोगों की जान बचाने के लिए उनके लिए तुरंत इलाज की व्यवस्था करने की जरूरत है।
इसके अलावा फोरम ने भंवरहार में हुईं मौतों के कारणों की जांच और इसके लिए दोषी स्वास्थ्य अमले के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। फोरम के कार्यकर्ताओं का कहना है कि भंवरहार में तीन मौतें जुलाई माह में महज एक सप्ताह में हुईं, पर यहां एक एएनएम तक नहीं पहुंची, जब यह समाचार दैनिक भास्कर में प्रकाशित हुआ तो विभाग की कान पर जूं रेंगी, बावजूद इसके बीमार लोगों की सूचना न देने की लापरवाही करने वाले कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।