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बैंक घोटाले में सीरियल छापे

रायपुर. बहुचर्चित इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक घोटाले में सालभर खामोश बैठने के बाद पुलिस ने शुक्रवार को अचानक सीरियल छापे मारकर राजधानी में खलबली मचा दी। पुलिस की दर्जनभर टीमों ने सुबह 9 से 9.30 बजे के बीच सभी फरार आरोपियों के ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। चारों गिरफ्तारियां छापे के दौरान हुईं।

पुलिस ने आडिटर पुष्पा शर्मा, अनिंदय मुखर्जी और कैलाशनाथ को शाम 5 बजे के बाद न्यायालय में पेश किया। समय समाप्त हो गया था, इसलिए जज ने मामले की सुनवाई नहीं की। तीनों को पुलिस वापस थाने ले आई। सिटी एसपी डा. लाल उमेद सिंह ने बताया कि संचालक मंडल की गिरफ्तार सदस्य कांति उपाध्याय का स्वास्थ्य ठीक नहीं था। इस वजह से उन्हें न्यायालय नहीं ले जाया जा सका। उन्हें कल पेश करने की कोशिश की जाएगी।

अफसरों ने दावा किया कि बैंक अध्यक्ष रीता तिवारी सहित अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जाल फैला दिया गया है। आरोपी शहर के बाहर जिन ठिकानों पर छिपे हैं, उनका पता लगा लिया गया है। इंदिरा बैंक की जांच में जुटे अफसरों को सूचना मिली थी कि बैंक घोटाले के फरार आरोपियों में ज्यादातर इन दिनों अपने घरों में ही छिपे हैं। इसके बाद जांच टीम के साथ राजधानी के अफसरों ने पिछले हफ्ते बैठक की।

हफ्तेभर पहले से सभी संबंधित बंगलों के बाहर सादी वर्दी में जवान तैनात कर दिए गए। तैनात जवानों ने सूचना दी कि आरोपियों को आते-जाते देखा गया है। इसके बाद पुलिस ने शुक्रवार का दिन तय किया। छापे में रायपुर ही नहीं, दुर्ग और राजनांदगांव पुलिस की मदद भी ली गई। गौरतलब है कि बैंक घोटाले का भांडा फूटने के बाद से आधे से ज्यादा आरोपी फरार हैं।

कहां-कहां छापे
पुलिस की टीम ने पूर्व विधायक और कांग्रेसी नेता स्वरुपचंद जैन की पत्नी ललिता जैन को गिरफ्तार करने के लिए उनके बंगले में दबिश दी। पूर्व उपमहापौर गजराज पगारिया की पत्नी दुर्गा पगारिया, पूर्व विधायक राधेश्याम शर्मा की पत्नी पुष्पा शर्मा और कांग्रेस नेत्री सविता शुक्ला के मकान में छापे मारे गए।

संचालक मंडल की अध्यक्ष रीता तिवारी के विवि परिसर स्थित मकान की तलाशी भी ली गई। इनके अलावा किरण तिवारी, सुमन पाठक, संगीता शर्मा, पुष्पा शर्मा, कुसुम चौके, सरोजनी शर्मा, कांति उपाध्याय, अनिंदय मुखर्जी, कैलाशनाथ कश्यप और पुष्पा शर्मा के मकानों पर भी छापे मारे गए। संचालक मंडल से इस्तीफा दे चुकी अरुणिमा निगम का बयान भी लिया गया।

ऐसे हुआ गोलमाल
इंदिरा प्रियदर्शनी बैंक में करीब 28 करोड़ का गोलमाल होने का अंदेशा है। हालांकि पुलिस को अब तक 18 करोड़ के गोलमाल के दस्तावेजी सबूत मिले हैं। जांच टीम के मुताबिक 6 करोड़ 50 लाख रुपए का वारा न्यारा एफडीआर के जरिये किया गया। एफडीआर बनायी नहीं गई और बोगस एफडीआर से रुपए निकाल लिए गए। 6 करोड़ रुपए बैंकर्स चेक से उड़ाए गए। 5 करोड़ 90 लाख रुपए का गोलमाल फर्जी डिमांड ड्राफ्ट से किया गया। गवर्नमेंट डिपाजिट में गोलमाल कर एक करोड़ 60 लाख रुपए पार किए गए हैं।

संपत्ति कुर्क करेगी पुलिस
छापा मारकर आरोपियों को पकड़ने में नाकाम पुलिस ने संपत्ति कुर्क करने की तैयारी शुरु कर दी है। अफसरों ने बताया कि न्यायालय से आरोपियों का धारा 73 के तहत वारंट जारी हो चुका है। मतलब यह है कि उन्हें कोई भी आम नागरिक बंदी बनाकर पुलिस के समक्ष प्रस्तुत कर सकता है।

अब न्यायालय में धारा 82 के तहत वारंट जारी करने की अर्जी लगायी जाएगी। इस वारंट के जारी होने के बाद न्यायालय के माध्यम से आरोपियों को एक महीने में अपने आपको कानून के हवाले करने की मोहलत दी जाएगी। उसके बाद न्यायालय धारा 83 के तहत संपत्ति कुर्क करने के आदेश जारी करेगा। पुलिस ने आरोपियों की संपत्ति का पता लगाने की कवायद शुरु भी कर दी है।

शहर में गहमागहमी
पुलिस के सीरियल छापे की खबर करीब एक घंटे में पूरे शहर में फैल गई। फरार आरोपियों के घर पुलिस फोर्स सुबह से शाम तक डेरा डालकर बैठी थी। इससे आस-पास के पूरे इलाके में इसी बात की चर्चा थी। लोग अपने-अपने घरों के बाहर और छतों में खड़े होकर पुलिस की कार्रवाई को देख रहे थे। इंदिरा बैंक के खातेदारों को इस बात की भनक लग गई थी। कुछ खातेदार इकट्ठा होकर पुलिस की कार्रवाई का पता लगाने पहुंच गए।

दो साल से उलझी पुलिस

इंदिरा प्रियदर्शिनी बैंक में 1 अगस्त 2006 को ताला लगा, इसके बाद बैंक का संचालन अफसरों की तीन सदस्यीय समिति को सौंप दिया गया। खातेदारों की शिकायत पर कोतवाली में संचालकों के खिलाफ धारा 408, 420 और 120बी के तहत जुर्म दर्ज किया गया। संचालक मंडल की अध्यक्ष रीता तिवारी समेत दर्जनभर महिलाएं सितंबर से भूमिगत हैं। पुलिस केवल सुलोचना आडिल को गिरफ्तार कर पाई क्योंकि उसकी राजनैतिक पकड़ नहीं है। बाकी संचालक अब तक फरार हैं।

पुलिस ने फरार संचालकों पर इनाम घोषित कर रखा है, इसके बावजूद अब तक कोई पकड़ में नहीं आया। बैंक संचालक मंडल की सदस्य सविता शुक्ला, किरण तिवारी, सुमन पाठक, दुर्गा देवी पगारिया, ललिता जैन, संगीता शर्मा, पुष्पा शर्मा, कुसुम चौके, सरोजनी शर्मा, कांति उपाध्याय और पुष्पा शर्मा को पुलिस तलाश कर रही थी। सुलोचना आडिल, मैनेजर उमेश सिन्हा और फर्जीवाले में शामिल जगदलपुर निवासी नीरज जैन की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। आखिर पैसा गया कहां?
घोटाले के दो साल बाद पता नहीं चल पाया कि इतनी बड़ी रकम कहां चली गई? घोटाले की जांच सहकारिता विभाग के उप पंजीयक एलएल रायस्त और नागपुर की सीए टीम कर चुकी है। पुलिस यह काम लगातार कर रही है, इसके बावजूद यह बात सामने नहीं आई। जांच दल से जुड़े एक अफसर ने बताया कि फर्जीवाड़े के संबंध में बैंक के दस्तावेजों की जांच नए सिरे से होगी।

इस बारे में श्री रायस्त और बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सीएल ठाकुर से भी पूछताछ की जा रही है। इधर, पैसे लौटाने संबंधी सहकारिता विभाग के अफसरों के लिखित आश्वासन के बाद खातेदारों ने धन वापसी की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है। बैंक के 25 हजार खातेदार महीनों से बैंक के चक्कर काट रहे हैं। ग्राहकों में ज्यादातर निम्नवर्ग से हैं, जो अपनी कमाई का कुछ हिस्सा बैंक में जमा कर रहे थे।





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