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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. जिले में आर्ट्स के फस्र्ट ईयर में एडमिशन लेने के लिए छात्र-छात्राएं गवर्नमेंट कालेजों के चक्कर लगा रहे हैं। कालेजों में सीटें फुल होने के कारण एडमिशन बंद कर दिया गया है।
शहर के एसबीआर कालेज, नवीन कन्या कालेज, गल्र्स डिग्री कालेज सहित जिले के मरवाही, सीपत, बिल्हा, तखतपुर, कोटा, मुंगेली, पथरिया, पेंड्रा, गौरेला, रतनपुर व लोरमी कालेज में बीए फस्र्ट ईयर की अधिकांश सीटें फुल हो चुकी है। जहां कुछ सीट खाली हैं वहां विषयवार सीटें फुल हो चुकी है।
मसलन पोलिटिकल साइंस में 80 से अधिक छात्र-छात्राओं को एडमिशन नहीं दिया जा सकता, इसलिए कालेज चाहकर भी छात्र-छात्राओं को एडमिशन नहीं दे पा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 31 जुलाई तक कालेज प्रशासन द्वारा, तो 14 अगस्त तक कुलपति के परमिशन से कालेजों में एडमिशन लिया जाता है। इन कालेजों में लास्ट डेट से पहले ही सीटें फुल हो जाने के कारण देर से एडमिशन लेने पहुंच रहे छात्र-छात्राओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
एडमिशन के नाम पर वे कालेजों के चक्कर लगा रहे हैं और उन्हें एडमिशन नहीं मिल रहा है। गवर्नमेंट कालेजों में एडमिशन लेने की इच्छा रखने वाले अधिकतर छात्र लो व मिडिल क्लास फेमिली के होते हैं। वे प्राइवेट कालेजों में फीस के नाम पर ली जाने वाली बड़ी राशि नहीं दे सकते, लेकिन मौजूदा स्थिति में उन्हें गवर्नमेंट कालेजों के तीन गुना अधिक फीस देकर प्राइवेट कालेजों में एडमिशन लेना पड़ रहा हैं।
प्राइवेट कालेजों में फीस एक से डेढ़ हजार के बीच है, जबकि वहां परीक्षा शुल्क अलग से लिया जाता है। एसबीआर कालेज में 370 छात्र-छात्राओं का एडमिशन बीए फस्र्ट ईयर में हो चुका हैं, जबकि वहां सवा सौ से अधिक फार्म पेंडिंग हैं।
आज भी वहां आधा दर्जन छात्र एडमिशन लेने के लिए आए, लेकिन उनका फार्म एक्सेपट नहीं किया गया। जिले के ब्लाक व नगर पंचायत स्तर पर संचालित गवर्नमेंट कालेजों में भी तकरीबन पौने चार सौ फार्म पेंडिंग है। अधिकांश कालेजों में 60 से 80 सीटें हैं, जिनमें एडमिशन हो चुका है।
यूनिवर्सिटी ने हाथ खींचा
कालेजों में सीटों की संख्या में वृद्धि करने के मामले में गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी प्रशासन ने हाथ खींच लिया है। सभी गवर्नमेंट व प्राइवेट कालेजों को लिखे पत्र में उसने पहले शासन से अनुमति लेने की बात कही है। इसके बाद इसकी सूचना यूनिवर्सिटी को देने कहा है, ताकि इंस्पेक्शन टीम कालेज भेजी जा सके।
टीम को अगर कालेज में इन्फ्रास्ट्रक्चर सही व पर्याप्त मिलते हैं तब सीट बढ़ाने की अनुशंसा उसके द्वारा की जाएगी। अगर कालेजों द्वारा बगैर शासन व यूनिवर्सिटी की अनुमति के छात्रों को एडमिशन दिया जाता हैं, तो भविष्य में होने वाली समस्याओं के लिए वे खुद जिम्मेदार माने जाएंगे।
क्या है कारण
>> आईटीआई में एडमिशन नहीं मिलने पर छात्र एडमिशन लेने पहुंच रहे हैं।
>> हेड कांस्टेबल की परीक्षा में सफलता नहीं मिलने के कारण।
>> पीईटी, पीएटी व पीएमटी में असफल हुए छात्र बीए में प्रवेश के लिए अब प्रयास कर रहे हैं।
>> सीवी रमन यूनिवर्सिटी द्वारा कालेजों में कम शुल्क लेकर कंप्यूटर कोर्स चलाने के कारण।
>> प्राइवेट कालेजों की फीस जमा न करने के कारण गवर्नमेंट कालेजों के चक्कर लगा रहे छात्र।
कालेज छात्रों को बीए फस्र्ट ईयर में एडमिशन तभी दे सकते हैं, जब यूनिवर्सिटी द्वारा परमिशन दिया जाएगा। एसबीआर का इन्फ्रास्ट्रक्चर उचित होने पर एडमिशन देने का परमिशन दिया है।
—डा. बीएल गोयल, अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा विभाग