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साथ जी नहीं सके, दे दी जान

कोटा. कुन्हाड़ी क्षेत्र की पंचवटी कॉलोनी में रहने वाले एक युवक ने पार्क में तथा युवती ने अपने घर में जहर खाकर आत्महत्या कर ली। दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते थे और साथ रहना चाहते थे, जबकि लड़की के परिजन तैयार नहीं थे। युवक, युवती के पिता के आईटीआई संस्थान में पढ़ता था, जिसकी संचालक खुद लड़की थी।

पुलिस के अनुसार झालावाड़ जिले की खानपुर तहसील के हथाईखेड़ा गांव में रहने वाला 21 वर्षीय महेन्द्र नागर पुत्र बद्रीलाल नागर कोटा पढ़ने आया था। उसने पंचवटी कॉलोनी में हेमंत नागर के वैभवलक्ष्मी आईटीआई संस्थान में एडमिशन ले लिया। कुछ ही दिनों में हेमंत नागर की पुत्री 21 वर्षीय मीना उर्फ गोलू से उसका प्रेम हो गया। दोनों एक ही जाति के होने के कारण पहले से भी परिचित थे।

समय के साथ-साथ दोनों का प्रेम परवान चढ़ने लगा तो इसकी भनक मीना के परिजनों को लगी। उन्होंने सख्ती की तो महेन्द्र ने आईटीआई जाना छोड़ दिया, लेकिन उसी मोहल्ले में रहने लगा। परिवार की पाबंदियां बढ़ने लगी तो दोनों ने मंदिर में जाकर विवाह कर लिया। पिछले दिनों जब दोनों ने परिवार के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा तो परिवारजनों ने स्पष्ट रूप से मना कर दिया।

मीना को कई तरह से डराया-धमकाया गया, लेकिन वह नहीं मानी। हर जतन के बाद भी जब दोनों एक साथ नहीं रह सके तो गुरुवार रात को मीना ने अपने घर तथा महेन्द्र ने कॉलोनी के बाहर एक पार्क में जाकर जहरीला पदार्थ खा लिया। मीना ने सुबह 5 बजे अपने परिजनों को इसकी जानकारी दी। परिजन उसे लेकर एमबीएस अस्पताल पहुंचे, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। परिजन तुरत-फुरत में उसका पोस्टमार्टम कराकर शव घर ले गए और अंतिम संस्कार कर दिया।

इधर, दोपहर करीब 12.30 बजे पार्क में घास काट रही एक महिला ने युवक का शव देखा तो चीख पड़ी। कुन्हाड़ी पुलिस को सूचना दी। मौके पर सीआई राकेशपालसिंह पहुंचे। शव की शिनाख्त महेन्द्र के रूप में हुई तो उसका पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया। मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी।

सुसाइड नोट से खुला राज

महेन्द्र की जेब से पुलिस को चार पेज का एक सुसाइड नोट व पर्स मिला। पर्स में उसके व मीना के फोटो थे। सुसाइड नोट में पहले उसने अपने पिता को संबोधित करते हुए पूरी प्रेम कहानी का इजहार, शादी करने तथा साथ नहीं रह पाने पर मौत को गले लगाने का उल्लेख किया।

उसने लिखा कि वो किसी को दुख नहीं देना चाहता, लेकिन मीना उर्फ गोलू का परिवार हमें एक नहीं होने देना चाहता हैं, इसलिए मैं आपको अकेला छोड़कर जा रहा हूं। मुझे माफ कर देना। कमरे में 15 हजार रुपए रखे हैं, जो छोटे बहिन-भाई के काम आएंगे। अंतिम पन्ने पर मीना के पिता को ‘गुरुजी’ के नाम से संबोधित करते हुए लिखा कि हमें एक नहीं होने दिया तो क्या हम दूसरे जन्म में मिल जाएंगे।

डॉक्टरों के अनुसार दोनों ने आधी रात बाद जहर खा लिया था। मोबाइल की कॉल डिटेल के अनुसार रात को 1.17 बजे मीना ने महेन्द्र को फोन किया था। उसके बाद 2.30 बजे महेन्द्र ने मीना को फोन किया था। दोनों की काफी देर तक बातचीत हुई। दोनों ने जहर खाने के पहले और बाद में बातचीत की थी।

बिलख पड़ी बहिन
जगदीश की बड़ी बहिन को महेन्द्र ने बहिन बना रखा था। जब उसे इसकी सूचना मिली तो वह अपने पति के साथ घटनास्थल पर ही पहुंच गई और भाई का शव देखकर बिलख पड़ी। पुलिस को उसे समझाने में पसीना आ गया।

किसी को नहीं था भान
मीना के परिजनों ने पुलिस को बताया कि रात 11 बजे वो घर में बैठी बातचीत कर रही थी। उसके बाद सभी सोने के लिए अपने-अपने कमरों में चले गए। जहां उसने जहर खा लिया। किसी को उस समय उसका चेहरा देख यह अंदाजा भी नहीं हुआ कि उसके मन में खुद को खत्म करने की योजना बन रही थी।

तमाशबीनों का हुजूम
पार्क में युवक का शव मिलने की घटना कुछ ही देर में थर्मल कालोनी, पंचवटी कालोनी व आसपास के क्षेत्र में फैल गई। युवक कौन है? यह जानने के लिए कई लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। देखते ही देखते वहां लोगों का हुजूम जमा हो गया। स्थिति यह हो गई भीड़ की वजह से पुलिस अपना काम तक नहीं कर पाई। पुलिस जिसे भी रोकती वह उसकी पहचान करने का बहाना लगाकर वारदात-स्थल तक पहुंच जाता। बाद में पुलिस को हाथ जोड़कर लोगों से कहना पड़ा कि मृतक की शिनाख्त हो गई है, कृपया वापस लौट जाएं।

मरने से पहले एसएमएस किए
मरने से पूर्व महेन्द्र ने अपने जिगरी दोस्त जगदीश, योगेन्द्र, सोनू, शिक्षक एलके शर्मा, सीके शर्मा को रात 11.32 बजे व 2.24 बजे एसएमएस किए। जगदीश को उसने लिखा- >> ‘ऐ दोस्त आज रात को आपकी दोस्ती का चिराग बुझ जाएगा..।’
>> जगदीश व अन्य को उसने लिखा-
‘किसी की लाश फूलों से सजी है,
किसी को कफन तक नसीब नहीं है।
ऐ मेरे दोस्त, जिंदगी में देखकर चलना,
न जाने मौत किस लड़की की सूरत में खड़ी है।’





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