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International International इस्लामाबाद.
महाभियोग प्रस्ताव से बेखौफ पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने 11 अगस्त को नेशनल असेंबली का सत्र बुलाया है। इसी सत्र में उनके खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया जाना है। अगर यह प्रस्ताव नेशनल असेंबली और सीनेट दोनों में पारित हो जाता है तो मुशर्रफ को गद्दी छोड़नी होगी और तब वह ऐसा करने वाले पहले राष्ट्रपति होंगे।
उधर, प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने कहा है कि मुशर्रफ को संसद में नए सिरे से विश्वासमत प्राप्त करना चाहिए। इस बीच, पाकिस्तान की सियासी उथलपुथल पर भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कोई भी प्रतिक्रिया व्यक्त करने से इनकार कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, मुशर्रफ को उनके राजनीतिक सलाहकार शेख राशिद ने पद छोड़ने की सलाह दी है, लेकिन मुशर्रफ ने इसे नजरअंदाज करते हुए नेशनल असेंबली का सत्र बुलाया है।
सूत्रों ने शेख राशिद के हवाले से बताया है कि नेशनल असेंबली और सीनेट में पीपीपी-पीएमएल(एन) नीत सत्तारूढ़ गठबंधन महाभियोग के लिए जरूरी 295 वोटों का जुगाड़ कर सकता है।
सेना भी साथ नहीं: मुशर्रफ के लिए एक और बुरी खबर यह है कि इस बार सेना भी उनके साथ नहीं है। गौरतलब है कि गठबंधन सरकार ने गुरुवार को मुशर्रफ के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश करने की घोषणा की थी।
सिर्फ दो रास्ते : मुशर्रफ का समर्थन करने वाली पार्टी पीएमएल-क्यू के अध्यक्ष चौधरी शुजात हुसैन और सीनेट में नेता प्रतिपक्ष चौधरी परवेज इलाही ने राष्ट्रपति के सामने दो रास्ते सुझाए हैं। एक, वे या तो अपना पद छोड़ दें, अथवा महाभियोग का सामना करें। दोनों नेताओं का मानना है कि मुशर्रफ के लिए अपने संवैधानिक अधिकारों का पालन करते हुए संसद को भंग करना उचित नहीं होगा, क्योंकि इस कदम का न तो अवाम समर्थन करेगी और न ही राजनीतिक दल।
किसमें कितना दम : पाक संसद के निचले सदन नेशनल असेंबली में 342 सदस्य हैं, जबकि उच्च सदन सीनेट की सदस्य संख्या 100 है। पीएमएल-एन के वरिष्ठ नेता अहसान इकबाल ने सत्तारूढ़ गठबंधन के पक्ष में 300 सदस्यों के समर्थन का दावा किया है। फिलहाल संसद के दोनों सदनों में मुशर्रफ विरोधियों की संख्या 274 है। वहीं, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अगर 27 निर्दलीय, पीएमएल-क्यू के असंतुष्टों और सीनेट में बलूच समुदाय ने महाभियोग के पक्ष में पाला बदल दिया तो मुशर्रफ के सामने गद्दी छोड़ने के सिवा कोई और रास्ता नहीं बचेगा।
बदलाव चाहती है अवाम : पाक प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने बीजिंग में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि पाक की अवाम ने इस साल 18 फरवरी को हुए चुनाव में बदलाव के पक्ष में वोट दिया है, इसलिए बेहतर होगा कि राष्ट्रपति संसद में दोबारा विश्वासमत प्राप्त करें। पाकिस्तान की चारों प्रांतीय असेंबलियां भी मुशर्रफ से विश्वासमत प्राप्त करने की मांग के साथ प्रस्ताव पारित कर सकती हैं। पीएमएल के वरिष्ठ नेता इकबाल ने शनिवार को इस बात की जानकारी दी।
पद छोड़ने को कह सकती है सेना
लंदन. पाकिस्तान की सेना राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को एक हफ्ते के भीतर पद छोड़ने को कह सकती है। सेना को यह कतई मंजूर नहीं होगा कि मुशर्रफ को महाभियोग प्रस्ताव के जरिए हटाया जाए।
समाचार पत्र ‘द टेलीग्राफ’ ने गिलानी सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा है कि पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल अशफाक कियानी ने मुशर्रफ को अपने इस मंतव्य से अवगत करा दिया है।
इस अधिकारी का यह भी दावा है कि अगले कुछ दिनों में कियानी राष्ट्रपति को यह साफ कर सकते हैं कि महाभियोग का सामना करना देश हित में नहीं है। अधिकारी का कहना है कि सेना की बात मानने पर मुशर्रफ को देश से बाहर निकलने का सुरक्षित रास्ता मिल सकेगा।