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रक्षाबंधन अमूल्य स्नेह बंधन

रक्षाबंधन विशेष.rakhi देश में श्रावण पूर्णिमा के दिन भद्रारहित में रक्षाबंधन मनाने की परंपरा है। रक्षाबंधन के विषय में संक्रांति दिन एवं ग्रहण पूर्व काल का विचार नहीं किया जाता। शास्त्रों में भी कहा गया है रक्षाबन्धनं - इद्र ग्रहणसंक्रान्ति दिनेपि कर्तव्यम्।

इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व श्रावण पूर्णिमा 16 अगस्त, शनिवार को ही मनाया जाएगा। आम धारणा है कि भद्रकाल में रक्षाबंधन शुभ नहीं होता, लेकिन शास्त्रों के अनुसार भद्रा की समाप्ति काल में रक्षाबंधन शुभकारी ही माना जाएगा।

मुहूर्त प्रकाश के अनुसार कार्येत्वावश्यके विष्टे: मुखमात्रं परित्यजेत्। .. पुच्छे ध्रुवो जय:। इस प्रकार स्पष्ट है कि 16 अगस्त शनिवार को भद्रा प्रात: सूर्योदय से लेकर दोपहर 2 बजकर 33 मिनट तक रहेगी। इसमें भी भद्रामुख काल 11 बजकर 30 मिनट से 13 बजकर 33 मिनट तक रहेगा।

शास्त्रों के मतानुसार 16 अगस्त शनिवार को रक्षाबंधन दोपहर 2 बजकर 33 मिनट के पश्चात भद्रोपरांत का समय श्रेष्ठ होगा। आवश्यक परिस्थितिवश 11.30 से 13.33 बजे तक का समय छोड़कर भद्रा पुच्छकाल पर विघ्नेश्वर भगवान श्रीगणोश का स्मरण करते हुए रक्षाबंधन के पावन पर्व को खुशी के साथ मनाया जा सकता है। इस वर्ष श्रावण पूर्णिमा 16 अगस्त को चंद्रमा मकर राशि का होने तथा भद्रा का वास पाताल में होने के कारण दोपहर 11.30 से 13.33 मिनट को छोड़कर बाकी समय में रक्षाबंधन का शुभ कार्य किया जा सकेगा।

श्रावण शुक्ल सप्तमी को स्वाति नक्षत्र पूर्णिमा के कारण अनाज की पैदावार अच्छी होने की संभावना है, वहीं 16 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन चंद्रग्रहण का घटित होना अशुभ घटनाओं का संकेत भी दे रहा है। शनिवार के दिन सक्रांति का होना अशुभता को और बढ़ाएगा। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल बनेगा और जनता में संदेह की स्थिति पैदा होगी।

सोना, चांदी, दवाएं, श्रंगार, सामग्री, ईंट-पत्थर, रुई, जौ, चना, और सब्जी में तेजी आने की पूर्ण संभावना है। खंडग्रास चंद्रग्रहण 16-17 अगस्त क्८ ई. उत्तर 26.15 से 27.05 तक घटित होगा। खंडग्रास चंद्रग्रहण के सूतक और ग्रहण काल में स्नान, दान, मानसिक जप, मंत्र -अनुष्ठान, तीर्थस्नान व ध्यान व ग्रहण काल के मध्य हवन जैसे शुभ कार्यो का करना व्यक्ति के जीवनकाल के लिए लाभकारी होता है। इस काल में वृद्ध, बालक एवं गर्भवती महिलाओं के भोजन या दवा आदि लेने से कोई दोष नहीं लगता।

इस वर्ष का ग्रहण/घनिष्ठा तथा मकर कुंभ राशियों में घटित होगा। इसका विशेष प्रभाव वैदिक कर्म करने वाले ब्राrाण, ज्योतिषी, दानी, दक्षिण व पश्चिम दिशा में रहने वाले पर्वतीय प्रदेशों के निवासियों को पीड़ादायक हो सकता है। इसके फलस्वरूप रोगों की वृद्धि होगी।

मिथुन, तुला, मकर एवं कुंभ राशि वालों के लिए यह ग्रहण विशेष रूप से कष्टकारी सिद्ध होगा। कन्या राशि वालों के लिए ग्रहण मिश्रित फलदायी साबित होगा। रक्षाबंधन मुख्यतया भाई-बहन का त्यौहार है। रक्षाबंधन को नागपंचमी के दिन बोए हुए गेहूं के छोटे-छोटे पौधों या स्वर्ण की पूजा करने की परंपरा भी है।

इसी प्रकार प्रत्येक भाई का कत्र्तव्य है कि वह राखी का महत्व समझकर बहन के प्रति कत्र्तव्य परायणता का परिचय दें। जिन लोगों का यज्ञोपवीत संस्कार हो चुका होता है, वे इस दिन पुराना यज्ञोपवीत उतारकर उसकी पूजा के बाद नया जनेऊ धारण करते हैं। राखी का भावनात्मक बंधन प्रेम की डोरी का होता है। इसमें प्राकृतिक दोहन शक्ति होती है।

बहन-भाई को स्नेहपूर्ण आशीर्वाद रूपी कवच से संवारती है, ताकि इस संसार में उसका भाई नैतिक जीवन बिताने में समर्थ बने। ऐसी मान्यता है कि भारत में यदि अंजान स्त्री भी किसी पुरुष के हाथ में राखी का पवित्र धागा बांध दे तो वह पुरुष उस अंजान बहन की रक्षा के लिए रक्षासूत्र बांधते हैं। ब्राrाण वर्ग अपने यजमानों की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए उन्हें रक्षासूत्र बांधते हैं।

एक ऐतिहासिक घटना को भी याद करना जरूरी है सोलहवीं शताब्दी के आसपास मेवाड़ के राजपूत राणा सांगा के निधन के बाद जब उनकी महारानी कर्णावती ने राजकाज संभाला ही था कि गुजरात के सम्राट बहादुर शाह ने मेवाड़ पर चढ़ाई कर दी। राजपूतों की कम संख्या देखकर मेवाड़ की रानी कर्णावती ने दिल्ली के सम्राट हुमायूं को अपना पावन रक्षासूत्र राखी के रूप में भेजा।

राखी के इन पवित्र धागों में एक राजपूत वीरांगना की आस्था व हृदय की जो वेदना छिपी थी, वह जाति और धर्म से कहीं ऊंची थी। इस भावना ने मुगल सम्राट हुमायूं के हृदय को छू लिया और वह अपनी राखी बंध बहन की रक्षा के लिए मेवाड़ की हिफाजत करने को चल पड़ा। इस प्रकार एक भाई ने अपनी बहन के रक्षासूत्र की मर्यादा को कायम रखा।

इस दिन भाई अपनी बहन को यथाशक्ति उपहार देते हैं। उपहार के रूप में दी गई वस्तु में उसके प्यार की गरिमा छिपी रहती है। दरअसल राखी के पवित्र बंधन का मूल्य धन से नहीं चुकाया जा सकता। यह बंधन तो अनमोल है।





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arun
Friday, 15th Aug 2008, 23:42
i am very happy to know, when we should wear rakhi. and imortant suggestion also thanking you ur vital suggestion
sharda
Saturday, 16th Aug 2008, 21:39
There should be more news about tourism & carrier.earlier carrier mantra was really admirable.i like bhaskar very much & i am getting much knowledge because of it from last 6 years. thanks