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फसलों की विशेष गिरदावरी

चंडीगढ़. हरियाणा में बारिश के कारण फसलों को हुए नुकसान के आकलन के लिए विशेष गिरदावरी करवाई जाएगी। पीड़ित लोगों को मुआवजे के लिए मकानों को पहुंची क्षति का सर्वे करवाया जाएगा। इसके साथ ही भिवानी के शास्त्री नगर में बारिश से मकान गिरने से मरे मां-बेटे के आश्रितों को दो-दो लाख रुपए की मदद देने का भी फैसला किया गया है।

मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने आज राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में पानी भरने की स्थिति का जायजा लेने के बाद यहां यह जानकारी दी। कई प्रभावित गांवों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद उन्होंने कहा, भिवानी जिले में भरे पानी को तीन दिन में निकाल दिया जाएगा। हुड्डा ने अधिकारियों के साथ बैठक कर पानी निकालने के लिए किए गए प्रबंधों की समीक्षा भी की।

385 पंप लगाए हैं पानी निकालने के लिए : कैप्टन
सिंचाई मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव ने भिवानी, झज्जर व रोहतक में बारिश का पानी निकालने के लिए किए जा रहे प्रबंधों का जायजा लेने के बाद यहां कहा, इसके लिए 385 पंप लगाए गए हैं। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि हर संभव स्थानों पर पानी की निकासी के लिए और पंप लगाए जाएं।

40 हजार एकड़ भूमि प्रभावित
कैप्टन का कहना है, बाढ़ के पानी से भिवानी जिले के 36 गांवों की 12000 एकड़, रोहतक जिले के 20 गांवों की 8000 और झज्झर जिले के 30 गांवों की 20000 एकड़ भूमि प्रभावित हुई है।

समय पूर्व मानसून से किसानों की मौजां
समय से पहले मानसून आने से इस बार किसानों की बल्ले बल्ले हो गई है। हरियाणा में तो इस कारण से धान उत्पादक क्षेत्र में करीब एक लाख हैक्टेयर का इजाफा हो गया है। जिलों से राज्य कृषि मुख्यालय को प्राप्त हुई रिपोटरे के इस दफा 11.50 लाख हैक्टेयर से लेकर 11.75 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में धान उगाई जा रही है।

पिछली बार हरियाणा में 10.75 लाख हैक्टयर में धान की रोपाई की गई थी। इस बार उत्तरी क्षेत्र में महीना भर पहले मानसून आया गया है जबकि पहले यहां जून के आखिर या जुलाई के शुरू में मानसून की बारिश होती थी। धान को सिंचाई के लिए ज्यादा पानी की जरूरत पड़ती है और पहले बारिश होने से अब किसानों को पानी के लिए टयूबवैल पर आश्रित नहीं होना पड़ेगा।

इन जिलों में होता है ज्यादा उत्पादन
हरियाणा में मुख्यत: अंबाला, यमुनानगर,करनाल,कुरुक्षेत्र करनाल, पानीपत,सोनीपत,जींद आदि जिलों में ही मुख्य तौर पर धान उगाई जाती है। पिछली बार हरियाणा में चावल का 36.13 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हुआ था जबकि इस बार इसके करीब 40 लाख मीट्रिक टन उत्पादन होने की उम्मीद है।

बारिश फसलों के लिए फायदेमंद
कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक बीएस दुग्गल के मुताबिक समय से पहले मानसून से धान के अलावा गन्ना और ज्वार की फसल को भी फायदा हुआ है।





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