कुंड (हरियाणा). जिंदगी से मिले सबक सबसे ज्यादा असर करते हैं। अपनी चार बेटियों की पढ़ाई छुड़वा चुके भंवरसिंह को खरीद-फरोख्त में लगी दस रुपए की चपत से ऐसा सबक मिला कि अब उसने चौथी में पढ़ रहे बेटे को गुरु बनाकर साक्षर होने की ठान ली है। इतना ही नहीं वे अब अपनी बेटियों की भी पढ़ाई फिर शुरू करवाने वाले हैं।
रेवाड़ी जिले के इस कस्बे के श्रमिक भंवरसिंह (42) के जीवन में यह परिवर्तन तब आया जब उसके आठ वर्षीय पुत्र विजय ने बताया कि खरीद-फरोख्त के दौरान उसे दस रुपए कम दिए गए हैं। इसके बाद उसने पुत्र को ही गुरु मानकर पढ़ाई शुरू कर दी। मजदूरी कर विजय को पढ़ा रहे पिता को उसने हस्ताक्षर करना और गुणा करना सिखा दिया है।
भंवरसिंह ने हिसाब-किताब को कॉपी में लिखना शुरू कर दिया है। मजदूरी लेते समय वे अंगूठा लगाने के बजाय हस्ताक्षर करने लगे हैं। इससे उनमें आत्मविश्वास जागा है।
इन दिनों विजय पिता को अंग्रेजी सिखा रहा है। वह छह बहनों का इकलौता भाई है। अब भंवरसिंह कहते हैं कि बंजारा समाज में लड़कियों को पढ़ाने की परंपरा न होने के बावजूद वे अपनी बेटियों को शिक्षित करेंगे। गौरतलब है कि भंवरसिंह ने बड़ी बेटी तुलसी (16) की आठवीं के बाद पढ़ाई छुड़वा दी थी और बाद की तीन बेटियां कक्षा तीन तक ही पढ़ सकीं।