नई दिल्ली. बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों के कठिन दौर में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के घटते दाम से सरकार और तेल कंपनियों को बड़ी राहत मिली है इससे उनका बढ़ता बोझ हल्का होने लगा है। पिछले करीब बीस दिनों से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम १४७ डालर प्रति बैरल की रिकार्ड ऊंचाई से घटते हुए ११६ डालर प्रति बैरल तक नीचे आ चुके हैं।
कच्चे तेल के घटते दाम पर सरकार और तेल कंपनियां बड़ी उम्मीदों के साथ नजरें गड़ाए हुए हैं। गिरते दाम से न केवल तेल कंपनियों का नुकसान कम होगा बल्कि सरकार का भी सब्सिडी बोझ हल्का होगा।
एक समय ऐसा भी आया जब तेल कंपनियों का घाटा असहनीय हो गया और सरकार को पेट्रोल, डीजल के दाम बढ़ाने का कठोर निर्णय लेना पड़ा। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एस सुंदरेशन के अनुसार सरकार कच्चे तेल की घटती कीमतों पर बराबर नजर रखे हुए है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान रुख को देखते हुए तेल कंपनियों को पेट्रोलियम उत्पादों के घटे दाम पर बिक्री से होने वाला नुकसान घटकर करीब 195000 करोड़ रुपए रह जाने का अनुमान है। इसमें से करीब 65000 करोड़ रुपए की भरपाई तेल का उत्पादन और विपणन करने वाली कंपनियां अपने संसाधनों से करेंगी शेष करीब सवा लाख करोड़ रुपए की भरपाई सरकार तेल बांड जारी करके कर सकती है।
इससे पहले सरकार पर करीब एक लाख 40 हजार करोड़ रुपए के तेल बांड के जारी करने का बोझ पड़ रहा था। श्री सुंदरेशन के मुताबिक वर्ष की पहली तिमाही में तीनों तेल कंपनियों की कुल कम वसूली 48000 करोड़ रुपए रही है।
वित्त मंत्रालय ने करीब 50 प्रतिशत की भरपाई तेल बांड जारी कर की है। पेट्रोलियम मंत्रालय का आग्रह ६७ प्रतिशत के लिये था लेकिन वित्त मंत्रालय ने ५क् प्रतिशत यानी 24000 करोड़ रुपए के ही बांड जारी किए। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम मंत्रालय इसके लिए प्रयास जारी रखेगा।
पहली तिमाही में अकेले इंडियन आयल को ही 13500 करोड़ रुपए के बांड दिए गए तब जाकर कहीं कंपनी मुनाफा दिखाने में कामयाब रही। श्री सुदरेशन ने कहा कि जून में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के बढ़े दाम करीब 70 डालर प्रति बैरल पर आधारित हैं जबकि उस समय इंडियन बॉस्केट मूल्य १२९ डालर प्रति बैरल को छू चुका था।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक कच्चे तेल की भारतीय खरीद जुलाई से अब तक 130 डालर और अगस्त महीने के पिछले एक सप्ताह का औसत ११८ डालर प्रति बैरल है। जून महीने में जब पेट्रोल के दाम पांच रुपए और डीजल के दाम में तीन रुपए लीटर बढ़ाए गए थे। तब तेल कंपनियों को एक लीटर पेट्रोल पर २१.४५ रुपए, डीजल पर ३१.५८ रुपए का नुकसान हो रहा था।
मूल्यवृद्धि के बाद यह नुकसान कम होकर पेट्रोल पर 16.50 रुपए, डीजल पर 28.00 रुपए रह गया। मूल्य वृद्धि से पहले रसोई गैस सिलेंडर पर ३५३ रुपए का नुकसान था जो कि 50 रुपए दाम बढ़ने के बाद घटकर ३क्क् रुपए के आसपास रह गया लेकिन अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एलपीजी के दाम बढ़ने से यह पुन: बढ़कर ३३८ रुपए तक जा पहुंचा।
पिछले एक पखवाड़े में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिरने से तेल कंपनियों का नुकसान पेट्रोल पर 16.50 से घटकर 11.60 रुपए, डीजल पर 28.00 से घटकर २३.२५ रुपए लीटर रह गया है। हालांकि मिट्टी तेल और रसोई गैस में कंपनियों को फिलहाल कोई बड़ी राहत नहीं मिली है।