कोलंबो.
क्रिकेट अनिश्चितता का ऐसा खेल है, जिसमें कोई भी भविष्यवाणी करना खतरे से खाली नहीं होता। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर पर क्रिकेट की यह सबसे मशहूर कहावत शत प्रतिशत लागू होती है।
सचिन को वेस्ट इंडीज के ब्रायन लारा का ११९५३ रन का विश्व रिकार्ड तोड़ने के लिए श्रीलंका के खिलाफ तीन टेस्टों की श्रृंखला में सिर्फ १७ रन की जरूरत थी और हर कोई मान रहा था कि सचिन यह मील का पत्थरआसानी से पार कर जाएंगे, लेकिन सचिन के भाग्य में यह रिकार्ड तोड़ना शायद अपनी जमीन पर लिखा था, तभी इस सीरीज में अपनी छह पारियों में १५.८३ के मामूली औसत से सिर्फ ९५ रन बना पाए और इस रिकार्ड को तोड़ने से ७७ रन दूर रह गए।
मास्टर ब्लास्टर को अब यह रिकार्ड तोड़ने के लिए आस्ट्रेलिया के खिलाफ अक्टूबर में होने वाली घरेलू टेस्ट श्रंखला का इंतजार करना होगा। सचिन के अब १५क् टेस्टों से ५४. ३ से औसत से ११८७७ रन हैं। ३५ वर्षीय सचिन ने इस दौरे में टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले एकमात्र अभ्यास मैच में ६९ रन बनाए थे, लेकिन उसके बाद छह पारियों में वह आश्चर्यजनक रूप से ७, १, ५, ३१, ६ और १४ रन ही बना सके।
निर्णायक टेस्ट में जहां उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी वहीं वह सिर्फ छह और १४ रन बनाकर भारत को मझधार में छोड़ गए। श्रीलंका का दौरा शुरु होने से पहले पूरी संभावना व्यक्त की जा रही थी कि मास्टर ब्लास्टर सचिन वेस्टइंडीज के लारा का सर्वाधिक टेस्ट रनों का रिकार्ड आसानी से तोड़ देंगे।
सचिन के बचपन के मित्र विनोद कांबली ने भी कहा था कि यह रिकार्ड आसानी से टूट जाएगा, लेकिन सचिन का सीरीज में अभियान समाप्त हो चुका है और लारा का रिकार्ड अभी भी दूर की कौड़ी बना हुआ है। सचिन के लिए श्रीलंका का दौरा भाग्यशाली नहीं रहा। हालांकि उन्होंने टेस्ट सीरीज शुरु होने से पहले एकमात्र अभ्यास मैच में ६९ रन बनाए थे, लेकिन उसके बाद उनका बल्ला उनसे रुठा रहा।
कोलंबो के ¨सहलीज स्पोर्ट्स मैदान में वह ७ और १रन ही बना सके, जबकि गाले में दूसरे टेस्ट में उन्होंने पांच और ३१ रन बनाए। भारत पहला टेस्ट एक पारी और ३९ रन से हारा जबकि दूसरा टेस्ट उसने 170 रन से जीतकर श्रंखला में १-१ की बराबरी कर ली है। तीसरे टेस्ट में वह ६ और १४ रन बना कर आउट हुए और इस टेस्ट में भारत की हालत नाजुक है।