इंदौर. विदेश पहुंचे गांधी की आंखें भी आज के हजारों युवाओं की तरह वहां की विलासिता देख चौंधिया गई थी, पर उस तरुण ने 18-20 की उम्र में आत्मनिरीक्षण, आत्मचिंतन और आत्मशोधन के बाद खुद को जान लिया था। आज युवा दिशाहीन है। करोड़ों युवा स्कूल और कॉलेज जाते हैं, फिर भी तय नहीं कर पाते उन्हें करना क्या है?
यह बात गांधीवादी विचारक नारायणभाई देसाई ने कस्तूरबा गांधी ट्रस्ट द्वारा बास्केटबॉल कॉम्प्लेक्स में आयोजित बापू कथा के दूसरे दिन कही। उन्होंने कहा सच्ची नागरिकता को जानने व उसके पालन के बाद ही सत्याग्रह की ओर कदम बढ़ाया जा सकता है। सच्ची नागरिकता का पहला मंत्र है जो स्वतंत्रता या आजादी तुम चाहते हो वह सबको दो। जैसा व्यवहार अपने लिए चाहते हो वैसा पड़ोसी को भी दो।
विदेश जाने के तीन महीने बाद ही गांधी से किसी ने पूछा यहां जितने शहर घूमे उसमें कोई ऐसा एक नाम बताओ जहां लोग सड़क पर थूकते हों, उन्हें पता था जवाब ना में ही मिलेगा। फिर उन्होंने कहा मैं इंडिया गया था, तीन महीने रहा पर एक भी शहर ऐसा नहीं मिला जहां कोई थूकता न हो। बापू के जीवन के प्रमुख विशेषता थी निष्ठा और कार्यक्षमता का समुचित प्रयोग।
जब यह अलग-अलग हो जाते हैं तो परिणाम भयानक आते हैं। छह गीतों के माध्यम से उन्होंने बापू की विदेश यात्रा के प्रसंगों और प्रतिज्ञाओं का सुंदर चित्रण किया। कार्यक्रम में जस्टिस एन.के. मोदी, फादर प्रसाद, कुमार शानी, विष्णु बिंदल सहित कई विशिष्टजन, बुद्धिजीवी, छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। रविवार को निवाली, बड़वानी आश्रम से 50 छात्राएं भी बापू कथा सुनने आई।
परिभाषा तरुण और वृद्ध की
श्री देसाई ने तरुण और वृद्ध की परिभाषा बताते हुए कहा जो आने वाले कल को अच्छा बनाना चाहता हो वह तरुण और जो निष्क्रिय हो जाए वृद्ध। गुलाब के फूल में जिसे कांटा न दिखे वह तरुण और गुलाब के पीछे का जो कांटा देखे वह वृद्ध।
यह ले सकते हैं बापूकथा से
>> बापू की भाषा में नम्रता थी चापलूसी नहीं इसलिए विरोधी से भी नम्रता से बात करें और पक्षवालों से भी चापलूसी नहीं।
>> अन्याय करने वाले के साथ सहने वाला भी उतना ही दोषी होता है।
>> जैसा व्यवहार, परिणाम हम दूसरों से चाहते है वैसा ही उनसे भी करें।
>> युवा शिक्षा के साथ-साथ जीवन में उनकी दिशा या लक्ष्य भी तय करें।
कैदियों के बीच पहुंचे देसाई
श्री देसाई सुबह सेंट्रल जेल पहुंचकर कैदियों से मिले। अधीक्षक संजय पांडे, जेलर एम.के. तिवारी, रमेश आर्य व शैफाली तिवारी ने अगवानी की। परिचय डॉ. अनिल भंडारी ने दिया। श्री देसाई ने कैदियों से कहा आप वहां नहीं आ सकते, इसलिए मैं आ गया। उन्होंने बापू केजेल प्रंसग भी सुनाए।
कथा में आज
सोमवार को कथा में बापू के स्वदेश आगमन, दांडी यात्रा व सत्याग्रह आंदोलन से जुड़े प्रसंगों का वर्णन होगा।