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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior श्योपुर. इंसान में कुछ करने का जज्बा हो तो उसके लिए कोई भी मंजिल मुश्किल नहीं। बंजर भूमि को हरा-भरा करने की धुन में लगे बांसोद गांव निवासी 40 वर्षीय जयराम मीणा ने यह साबित कर दिया है।
उन्होंने बंजर भूमि में अकेले दम पर सैकड़ों, हजारों नहीं बल्कि तीन लाख पौधे लगाकर प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा रंग भर दिया है। बात यहीं नहीं ठहरती, जयराम ने अगले पांच वर्षो में आठ लाख और पौधे रोपने का संकल्प लिया है । इस प्रकार 11 लाख पौधे लगाने का अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए यह वृक्ष मित्र सतत लगा हुआ है।
जयराम के बीस वर्षो के अथक प्रयासों से बड़ौदा क्षेत्र में एक लाख से अधिक पौधे अब वृक्ष बनकर झूम रहे हैं। कड़ाकेकी सर्दी हो या तपती दुपहरी जयराम मीणा नियमित रूप से नई जगह पौधे रोपने और रोपे गए पौधों की सार-संभाल में व्यस्त रहते हैं। केवल साक्षर व किसान परिवार से संबंध रखने वाले जयराम मीणा ने इस कार्य की शुरुआत 20 साल पहले स्वयं के खलिहान और खेत पर शीशम के पौधे लगाकर की थी।
पौधे लगाने का शौक धीरे-धीरे जुनून में तब्दील हो गया तो फिर उन्होंने सवा लाख पेड़ लगाने का संकल्प लेकर इसके लिए क्षेत्र में बंजर व अनुपयोगी भूमि को चुना। पौधों की हिफाजत के लिए कहीं कंटीले झाड़ की बागड़ लगाई तो कहीं ट्री गार्ड की व्यवस्था की। घर की नर्सरी में तैयार पौधों को उपयुक्त जगह लगाकर अपने पुत्रों की तरह पाला पोसा ।
रोजाना साइकिल पर पानी की कैन रखकर सुबह जल्दी निकल जाना और स्थान-स्थान पर लगे पौधों को सींचना। हर साल गर्मियों में गड्ढे खोदना और फिर उनमें बारिश के सीजन में पौधे लगाना जयराम की दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा है।
पाया सम्मान
क्षेत्र में लहलहाते पौधों की तरफ अंतत: पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी संस्थाओं और प्रशासनिक आधिकारियों का ध्यान गया। फलस्वरूप वन विभाग द्वारा वर्ष 2006 में जयराम मीणा को अमृतादेवी विश्नोई वृक्ष मित्र पुरस्कार से नवाजा गया। वहीं इंदिरा प्रियदर्शनी पुरस्कार हेतु जयराम मीणा का नाम प्रस्तावित है।
इसके अलावा कलेक्टर शोभित जैन के माध्यम से भगवान महावीर फाउंडेशन अवार्ड के लिए उसका नाम चेन्नई भेजा जा चुका है। सरकारी स्तर पर मिले प्रोत्साहन से जब हौसला बढ़ा तो जयराम मीणा ने सन् 2013 तक 11 लाख पौधे लगाने का संकल्प ले लिया और धार्मिक व सार्वजनिक स्थलों, सड़क व नदियों के किनारे जहां भी उपयुक्त जगह दिखती है वहीं पौधे लगाने व उनकी सुरक्षा के कार्य में समर्पित भाव से जुट जाते हैं।
किन-किन जगहों पर लगाए पौधे
बड़ौदा से ललितपुरा तक और बड़ौदिया से कलमुंडा तक सड़क के दोनों साइड,बालापुरा से ललितपुरा तक अहेली नदी के दोनों किनारों पर,रूंडी तथा राजोरा से बड़ौदिया बिंदी तक पार्वती नदी के किनारे,कालापट्टा और मकड़ावदा के बीच वन विभाग की दो सौ हेक्टेयर भूमि पर,खातौली तिराहा,भोगी का तिराहा,प्रेमसर से खातौली चौकी तक सड़क किनारे,अडवाड़,खेड़ली,बांसोद,बड़ौदा,मूंडला,रूंडी,बड़ौदिया बिंदी,बड़ौदिया जिंसी,बड़ौदिया घाट,कुहांजापुर,सारंगपुर,उदौतपुरा,बिच्छू बावड़ी,नयागांव,श्रीपुरा,प्रेमपुरा,कलौनी।