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राज्य में झमाझम

रायपुर. बंगाल की खाड़ी में हलचल के साथ ही राज्य के कई इलाकों में रविवार सुबह झमाझम पानी बरसा। मूसलाधार से कहीं-कहीं नालों में ऊफान की सूचना है। इसी दौरान लवन में बिजली गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई।

राजधानी में सुबह तकरीबन दो घंटे तेज बारिश हुई। मौसम विभाग ने यहां 32.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की है। भिलाई-दुर्ग में रुक-रुक कर पानी बरसा। बस्तर संभाग के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की खबर है। बिलासपुर इलाके में भी मानसून मेहरबान रहा। लालपुर मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार यह बारिश राज्य के सभी इलाकों में हैं।

सर्वाधिक बारिश नारायणपुर में 120 मिलीमीटर रिकार्ड की गई। रायपुर जिले के देवभोग इलाके में नवागढ़ नाले के ऊपर पानी बहने से यातायात ठप हो गया है। सुबह से शाम तक माना में 18.6 मिमी बारिश दर्ज की गई। पिछले 24 घंटों के दौरान अंबिकापुर में 10, पेंड्रारोड में 25.9, जगदलपुर में 45.5, जांजगीर-चांपा में 39.2, राजनांदगांव में 37 और बिलासपुर में 7.4 मिमी बारिश हुई।

इसलिए बरसे बादल : बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र अभी उड़ीसा के ऊपर स्थित है। इसके असर से राज्य में हवा के साथ बहुत अधिक नमी आ रही है। इस वजह से आसमान में काले-घने बादल छाए और आखिरकार लंबे इंतजार के बाद बादल बरस पड़े।

भारी बारिश की चेतावनी : लालपुर मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक एमएल साहू ने बताया कि सिस्टम उड़ीसा से आगे बढ़ रहा है। इसके राज्य में प्रवेश करते ही और व्यापक बारिश की संभावना है। इसका सबसे ज्यादा असर रायपुर-बस्तर संभाग में होगा। उन्होंने बताया कि 48 घंटों के दौरान रायपुर और बिलासपुर संभाग में कुछ स्थानों पर भारी से अतिभारी बारिश होने की आशंका है। बिलासपुर संभाग में 1-2 स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है।

खेतों की प्यास बुझी : राज्य में अब तक 684 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। यह 10 वर्षो की औसत वर्षा 690 मिमी के करीब है। रविवार की बारिश को इस सीजन की सर्वाधिक व्यापक बारिश मानी जा रही है। कुछ जिलों में बारिश कम थी वह अब औसत के आसपास पहुंच गई हैं। बियासी और रोपाई का काम अंतिम दौर में हैं। रविवार की बारिश से खेतों में पानी भर गया है। इसे धान की फसल के लिए लाभदायक माना जा रहा है। हालांकि कुछ जगह अभी भी बारिश कम हुई है।

सिकासेर के गेट खुले : गरियाबंद इलाके में सिकासेर डैम दो दिन पहले ही भर चुका है। पिछले 24 घंटों में हुई मूसलाधार बारिश के बाद पानी की आवक को देखते हुए रविवार को डैम के सभी 22 गेट खोल दिए गए। इससे पैरी नदी में बाढ़ आ गई है। गंगरेल बांध आधा भर चुका है। कैचमेंट एरिया में अच्छी बारिश से बांध में पानी की आवक बढ़ी है। सोंढूर और दुधावा में भी जलस्तर बढ़ रहा है।

कई गांव बने टापू : भारी बारिश से प्रदेश में 50 से ज्यादा गांव टापू में बदल चुके हैं। नारायणपुर-कोंडागांव के बीच ग्राम छेरीबेड़ा के पास पुल बाढ़ में डूब जाने से रविवार को रास्ता बंद हो गया। माड़िन नदी में जलस्तर बढ़ने से नारायणपुर-ओरछा मार्ग तथा गरियाबंद के पास सोंढूर और पैरी नदी के संगम स्थल पनटोरा में आई बाढ़ से रायपुर-गरियाबंद मार्ग बंद हो गया।

छुरा मार्ग पर कस नाला उफान पर है। मैनपुर मार्ग भी मुड़झुड़ी नाले का जलस्तर बढ़ने से बंद हो गया। देवभोग से गरियाबंद के बीच झापन नाले में भी पानी बढ़ जाने से रास्ता बंद है। नगरी में बेलरगांव के पास सीतानदी पुल के पास सड़क पर चार फुट ऊपर पानी बह रहा है। घुरावड़ और अमाली के बीच पुलिया बाढ़ में बह जाने की सूचना है।

महानदी, सीतानदी और सोंढूर नदियों में आई बाढ़ से अंदरूनी गांवों का जिला मुख्यालय धमतरी से सड़क संपर्क टूट गया है। जगदलपुर में इंद्रावती नदी व कोंटा के पास शबरी नदी का पानी खतरे के निशान तक पहुंच गया है।





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