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जरूरी है इस सोने को जिद में बदल देना

विशेष टिप्पणी. shravan अभिनव बिंद्रा केवल एक स्वर्ण पदक नहीं है, वे स्वर्ण प्रतीक हैं भारत देश की उभरती हुई युवा शक्ति के। ओलिंपिक में स्वर्ण पदक के जरिए अभिनव के मार्फत भारत ने शायद अपनी खोज को पूरा कर लिया है।

अपनी अद्भुत उपलब्धि के बाद भी अभिनव के चेहरे पर न तो कोई अभिनय था और न ही आंखों में खुशी के कोई आंसू। देश के असली युवाओं की भी यही पहचान है। वे दुख में दुखी नहीं होते और सुख प्राप्त कर बिफरते भी नहीं। अभिनव ने कहा- कल का दिन किसी और का हो सकता है, आज का दिन मेरा था। यह एक विजेता का आत्मविश्वास है।

अभिनव की जीत ओलिंपिक जैसी अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में भारत के खोते हुए आत्मविश्वास की वापसी है। सौ करोड़ की आबादी वाला मुल्क और लाखों की संख्या में विदेशों में रह रहे अप्रवासी भारतीय आज न सिर्फ अपने सिर ऊंचे करके खड़े हैं अपने उन खिलाड़ियों की हौसला अफजाई में भी जुट गए हैं जिन्होंने बीजिंग में हमारी उम्मीदों के चिराग अभी बुझने नहीं दिए हैं, जो संघर्ष कर रहे हैं भारतीय दल की एक सम्मानपूर्ण स्वदेश वापसी के लिए।

पदक तालिका में आज भारत का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है। कल्पना करते हुए सिहरन होनी चाहिए कि अपने ‘चीनी’ मेजबानों के यहां से भारतीय दल को अगर पूरी तरह खाली हाथ लौटना पड़ता तो हम उस सदमे को किस तरह से बर्दाश्त कर पाते। अभिनव की जीत में इस दर्द की तलाश भी की जा सकती है कि देश की अकूत संपदा के जितने हिस्से का निवेश युवाओं के कंधे मजबूत करने में होना चाहिए वह नहीं हो रहा है।

अजरुन और एकलव्य दोनों ही आज एक साथ भी हैं और मछली की आंख से कहीं बहुत दूर उपेक्षित भी खड़े हैं। अभिनव बिंद्रा को हमारी व्यवस्था ने न तो तलाशा और न तराशा। अभिनव को जो चहिए था वह उसके अभिभावकों ने दिया। देश के लिए तो वे बीजिंग ओलिंपिक में एक डार्क हॉर्स साबित हुए हैं। सटोरियों ने पैसा अभिनव पर नहीं लगाया था। अब देश उन पर लुटा रहा है।

अभिनव को प्राप्त हुए स्वर्ण पदक की रोशनी में देश उन युवाओं तक पहुंचने की हिम्मत जुटा सकता है जो भारत के लिए पदकों की बरसात कर सकते हैं। अभिनव बिंद्रा का चेहरा देश के करोड़ों-करोड़ युवाओं से मेल खाता है। जरूरत केवल उन युवाओं की आंखों में बसे सोने जैसे सपनों को तलाश कर तराशने की है।

अगला ओलिंपिक ज्यादा दूर नहीं है। चार साल का वक्त बीजिंग से जीते सोने का जश्न मनाने में ही नहीं गुजर जाए। अभिनव ने देश के युवाओं में जिस जज्बे का संचार किया है उसकी गर्माहट किसी जिद में बदलनी चाहिए।





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