इंदौर. एमवाय अस्पताल में एक्स-रे के घातक असर से बचने के उपायों की जमकर अनदेखी के चलते सभी एक्स-रे रूम खतरनाक हो गए हैं। एक्स-रे मशीन के साथ काम करने वाले स्टाफ को एप्रन, मास्क, दस्ताने, चश्मा नहीं मिलते। वहीं सुरक्षा संबंधी चेतावनियां नहीं लिखने व दरवाजे खुले रहने के कारण लोग भी चाहे जब एक्स-रे रूम में आते-जाते हैं।
परमाणु ऊर्जा नियामक मंडल के स्पष्ट निर्देश हैं एक्स-रे रूम के बाहर रेडियोएक्टिव विकिरण से सुरक्षा की जानकारी लिखना चाहिए लेकिन एमवायएच के चार कक्षों में से किसी के भी बाहर कुछ नहीं लिखा है। रेडियोग्राफर व अन्य स्टाफ भी बगैर एप्रन, मास्क, ग्लोव्स, चश्मा पहने काम करते हैं। कक्षों में रखी लेड वॉल के सामने से लोग बेतरतीब ढंग से निकलते रहते हैं।
रूम नंबर-सात में एक्स-रे मशीन है और पास में गायनिक ओपीडी। अकसर गर्भवती महिलाएं इस कक्ष में चली जाती हैं। एक्स-रे करवाने वाले के साथ आए लोग भी वहीं खड़े रहते हैं। लेड वॉल के अलावा कोई सुरक्षा उपाय नहीं होने से हानिकारक विकिरण सभी के शरीर में प्रवेश का खतरा रहता है। रेडियोलॉजी विभाग प्रभारी डॉ.आर.पी. सिंह के मुताबिक लेड वॉल से सुरक्षा हो जाती है। लोग मना करने के बाद भी नहीं मानते। वैसे ये विकिरण ज्यादा नुकसान नहीं करते।
नियमों का उल्लंघन
परमाणु ऊर्जा नियामक मंडल के अनुसार एक्स-रे रूम पूरी तरह बंद होना चाहिए। कक्ष के बाहर विकिरणों से सुरक्षा के बारे में लिखना चाहिए। एमवायएच में कुछ दिन पहले एक-दो कक्ष में खतरे संबंधी संकेतक जरूर लगाए हैं लेकिन एक्स-रे से बचने की कोई सूचना नहीं लिखी।
तिमाही रिपोर्ट के भी पते नहीं
रेडियोग्राफर काम करते समय लगाए जाने वाले बेज में लगी स्लाइड से रेडिएशन की मात्रा का पता लगता है। ये स्लाइड हर तीन महीने बाद भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर भेजी जाती है। अभी तक किसी भी कर्मचारी की रिपोर्ट नहीं आई है। डॉ. सिंह के मुताबिक रेडिएशन की मात्रा अधिक मिलेने पर ही रिपोर्ट आती है।
अल्प मात्रा भी हानिकारक
रेडियोग्राफर एसोसिएशन अध्यक्ष शिवाकांत वाजपेयी ने बताया बेज में लगी स्लाइड से रेडिएशन (विकिरण) का प्रतिशत निकाला जाता है। रेडियोग्राफर के लिए यह 0.20 रेम से अधिक नहीं होना चाहिए। सामान्य आदमी के लिए अल्प मात्रा ही हानिकारक होती है। गर्भवती महिलाओं को भी इसीलिए बचने की हिदायत दी जाती है।