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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. जब अभिनव मात्र पांच साल के थे उसी समय खेल के प्रति उनके रुझान का पता उनके माता-पिता को चल गया था।
अभिनव के पिता एएस बिंद्रा ने बताया कि अभिनव पांच साल का था, एक दिन मैंने देखा कि वह आया के सिर पर पानी से भरा गुब्बारा रखकर उस पर गुलेल से निशाना लगा रहा है। उस समय आया काफी घबराई हुई थी, पर अभिनव ने एकदम सधा निशाना लगाया।
यह कारनामा देखकर मुझे लगा कि निशानेबाजी उसे पसंद है और उस समय से उसके निशानेबाज बनने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए जो कुछ भी हमसे हो सकता था हमने किया।
बचपन में ही अभिनव की क्षमता का पता चल जाने के बाद उनके पिता ने अभिनव की ट्रेनिंग, बेहतरीन कोच को उपलब्ध कराने और निशानेबाजी के उपकरणों पर काफी पैसा खर्च किया। बीजिंग जाने से तीन माह पहले अभिनव ट्रेनिंग, शारीरिक और मानसिक फिटनेस के लिए विदेश गए थे।
अभिनव के पिता ने कहा, ‘हम सभी के लिए यह एक बड़ा दिन है।’ अभिनव की इस शानदार उपलब्धि के बाद उनका परिवार मत्था टेकने के लिए स्वर्ण मंदिर जाने की तैयारी कर रहा है।