जयपुर. बीजिंग आलिंपिक में सोमवार को व्यक्तिगत स्पर्धा में पहले स्वर्ण की खुशी न केवल बाजार, स्कूल, गली-मोहल्लों और चौराहों पर ही दिखाई दी, बल्कि घरों में बैठक से रसोईघर तक में इसी की चर्चा होती रही।
हर कोई इस पल को टीवी पर देख अपने दिल को खुश करने में लगा था। ओलिंपिक में अब तक केवल हॉकी में ही आठ स्वर्ण पदक मिले हैं, लेकिन व्यक्तिगत रूप में किसी खिलाड़ी ने दुनिया में पहली बार इस स्तर पर देश का नाम रोशन किया है।
जयपुर में अभिनव बिंद्रा की जीत पर छात्र व सामाजिक संगठनों ने खुशियां मनाईं। पटाखे छोड़ कर आतिशबाजी की। लोगों को जैसे ही अभिनव के स्वर्ण पदक जीतने की जानकारी टीवी चैनल से मिली, वैसे ही आपस में बधाइयां देने लगे। लोगों ने एक दूसरे को फोन व एसएमएस कर जानकारी दी। कुछ ही देर में शहर के दफ्तर, कॉलेजों, स्कूलों समेत सभी जगहों पर जीत का जश्न मनाया जाने लगा।
पंजाबी महासभा के जिलाध्यक्ष रवि नैयर के नेतृत्व में पंजाबी समुदाय राजापार्क के चौराहे पर एकत्रित हो गया। वहां लोगों ने पटाखे छोड़े, ढोल-नगाड़े बजा कर खुशियां मनरई। पूरे बाजार में मिठाइयां बांटी गईं।
विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर एनएसयूआई और एबीवीपी के छात्रों ने आतिशबाजी की और मिठाइयां बांटीं। राष्ट्रीय युवा चेतना परिषद के अध्यक्ष मित्रोदय गांधी ने कार्यकर्ताओं के साथ पटाखे छोड़ कर जीत का जश्न मनाया। भाजपा वार्ड 69 के अध्यक्ष दिनेश कांवट और शहर मंत्री रविशंकर शर्मा के नेतृत्व में विद्याधरनगर बस स्टैंड पर जीत की खुशियां मनाईं। उन्होंने वाहन रैली निकाल कर अभिनव बिंद्रा की जीत के नारे लगाए। राजस्थान अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जसबीर सिंह ने बिंद्रा को उनकी ऐतिहासिक जीत पर बधाई दी। पूर्व पार्षद मुकेश चौहान ने इस जीत को युवाओं के लिए प्रेरणादायी बताया। चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ.विवेक शर्मा का कहना था कि बिंद्रा की जीत उनके संघर्ष की जीत है। इससे हमें समझना चाहिए कि सफलता सिर्फ संघर्ष से ही मिलती है। उसका कोई शॉर्टकट नहीं होता। एडवोकेट योगेश गुप्ता का कहना था कि हमारे देश के खेल संघों और सरकारों को समझना चाहिए कि क्रिकेट ही नहीं और भी खेल हैं, जहां खिलाड़ी को प्रोत्साहन मिले तो वे विश्व स्तर पर भारत का परचम लहरा सकते हैं।
निजी कंपनी में सेवारत मंजुल सैनी का कहना था कि बिन्द्रा की जीत ने साबित कर दिया है कि हम किसी से कम नहीं है। एडवोकेट अमित विजय और नरेश सैन का कहना था कि बिन्द्रा की जीत युवाओं को हमेशा एहसास कराएगी कि सफलता के लिए धैर्य और कठोर परिश्रम जरूरी है।