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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. शासन ने एस्कार्ट हार्ट सेंटर में इंफ्रास्ट्रक्चर और गरीबों के मुफ्त इलाज पर हुए सरकारी खर्च की पड़ताल का फैसला किया है। इसके लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। समीक्षा का निर्णय उस समय लिया गया, जब एस्कार्ट प्रबंधन ने मशीनों के लिए 10 करोड़ रुपए और मांगे।
राज्य गठन के बाद सरकार ने पांच साल पहले पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत एस्कार्ट हार्ट सेंटर की स्थापना की। समझौते के अनुसार सरकार को भवन और उपकरणों का खर्च वहन करना था। अब तक सरकार दो किश्तों में 13 करोड़ रुपए खर्च कर चुकी है। इसके एवज में एस्कार्ट आने वाले मरीजों में से दस फीसदी का इलाज मुफ्त होना है।
ये मरीज शासन की ओर से भेजे जा रहे हैं। अब यह देखा जा रहा है कि सरकार जितना खर्च कर रही है, गरीबों को उतना फायदा मिल रहा है या नहीं? इसकी समीक्षा के लिए स्वास्थ्य सचिव आर एस विश्वकर्मा ने चिकित्सा शिक्षा संचालक डा. एसएल आदिले और मेडिकल कालेज के डीन डा. सुबीर मुखर्जी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की है। कमेटी पिछले पांच साल के दौरान फ्री उपचार की सुविधा पाने वाले एक-एक मरीजों की हिस्ट्री चेक करेगी। सेंटर में मरीजों को अब तक क्या-क्या फ्री ट्रीटमेंट दिया गया है, कितने मरीजों की बाईपास सर्जरी निशुल्क की गई है, यह देखा जाएगा।
समीक्षा के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि एस्कार्ट हार्ट सेंटर में रकम लगाना जनता के हित में है या नहीं। उसके बाद सरकार भविष्य की नीति तय करेगी। हेल्थ डायरेक्टर ने बताया कि समीक्षा के बाद सरकार को रिपोर्ट भेजी जाएगी। अंतिम निर्णय सरकार को लेना है। यह पूरी कसरत एस्कार्ट हार्ट सेंटर प्रबंधन द्वारा 10 करोड़ रुपए मांगे जाने के बाद शुरु हुई। प्रबंधन ने हेल्थ सेकेट्ररी के समक्ष 10 करोड़ रुपए की पेशकश की है। प्रबंधन का कहना था कि सर्जरी में उपयोग आने वाली कई मशीनें खराब हो चुकी हैं। कुछ उपकरण चलन से बाहर हो गए हैं।
यह भी तर्क दिया गया है कि मार्केट में उपलब्ध अत्याधुनिक मशीनों से मरीजों को बेहतर सुविधा दी जा सकती है। ऐसा भी कहा गया है कि अस्पताल में भीड़ बढ़ने से जगह भी कम पड़ने लगी है। मशीनों व उपकरणों के साथ-साथ अस्पताल की बिल्डिंग का विस्तार किया जाएगा। बताते हैं कि प्रबंधन की ओर से हालांकि कोई डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट नहीं भेजी गई है। इसके बावजूद सचिव ने कमेटी बनाकर लाभ-हानि की समीक्षा शुरु कर दी है।