जोधपुर. राज्य सरकार ने नगर विकास न्यास से कॉक्स कुटीर के समीप स्थित भूमि की तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। तीन खसरों में स्थित इस भूमि में 20.35 बीघा पर आबाद संतोषपुरा कच्ची बस्ती के नियमन को तो सरकार ने हरी झंडी दे दी है, लेकिन इन्हीं खसरों की दूसरी भूमि के नियमन के लिए सरकार ने अभी मंजूरी नहीं दी है।
नगरीय विकास विभाग के उप शासन सचिव ने न्यास सचिव को संतोषपुरा कच्ची बस्ती का नियमन इसी शर्त पर करने को कहा है कि इसमें हाईकोर्ट का कोई प्रतिकूल आदेश नहीं होने की जांच की जाए। इसके अलावा सर्वे शुदा व्यक्तियों का ही नियमन करने को कहा गया है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि नियमन का आदेश संतोषपुरा कच्ची बस्ती पर ही लागू होगा, कॉक्स कुटीर पर नहीं। कॉक्स कुटीर के लिए सचिव को अलग से टिप्पणी भिजवाने के निर्देश दिए गए हैं।
हालांकि सरकार के इस आदेश से एक बिंदु पर असमंजस की स्थिति बन गई है कि क्या संतोषपुरा कच्ची बस्ती को कॉक्स कुटीर से अलग मानते हुए नियमन के आदेश दिए गए हैं या केवल कॉक्स कुटीर में स्थित इस बस्ती के लिए सरकार ने विशेष छूट दी ह।
दरअसल, यह बस्ती खसरा नं-513 /1, 513/3 एवं 513/10 में स्थित 91.45 बीघा भूमि में ही बसी हुई है, जो सालों से विवादास्पद है। इसे ही कॉक्स कुटीर के पास की भूमि के नाम से जाना जाता है। इस भूमि को जोधपुर रियासत ने अवाप्त करते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग के डवलपमेंट विभाग को सुपुर्द किया था, लेकिन राजस्व अभिलेखों में इन खसरों की भूमि आबादी के रूप में डवलपमेंट विभाग के नाम दर्ज नहीं हुई और कृषि भूमि के रूप में ही दर्ज रही।
इस भूमि में से 22. 98 बीघा भूमि सड़कों में, 20.35 बीघा भूमि संतोषपुरा कच्ची बस्ती में तथा 13.77 बीघा भूमि बरकतुल्लाह खां स्टेडियम के निर्माण में चली गई है। शेष 34.75 बीघा भूमि अन्य प्रयोजनार्थ उपलब्ध है। इस भूमि में से 20 हजार वर्ग गज भूमि समझौते के रूप में अधिकारदाताओं को देने के लिए न्यास ने 28 अप्रैल 1982 को समझौता किया था।
इसके खिलाफ विजय मेहता ने जनहित याचिका दायर कर दी। इस याचिका पर स्थगन आदेश मिल गया। बाद में राज्य सरकार ने आदेश दिए कि इस स्थगन आदेश को कन्टेस्ट नहीं किया जाए और न्यास को कहा कि स्थगन आदेश यदि निरस्त हो भी जाए तो समझौते पर अमल नहीं किया जाए।
इस याचिका का निस्तारण 1995 को इस आदेश के साथ हुआ कि पक्षकार सक्षम न्यायालय से अनुतोष प्राप्त करने के लिए स्वतंत्र होंगे। कैलाशराज टाटिया के एक अन्य मामले में सिविल कोर्ट ने 1994 में उनके पक्ष में डिक्री पारित कर दी। डिक्री में वर्णित था कि न्यास वादियों को 20 हजार वर्ग गज भूमि से बेदलख नहीं कर सकेगा। न्यास ने इस निर्णय के खिलाफ जिला न्यायालय में अपील की, जिसे न्यास के 1997 के प्रस्ताव की पालना में व्रिडा कर दिया गया।
कहां अटका मामला
न्यास ने 1997 के समझौते की पुष्टि के लिए सरकार को प्रस्ताव भेज दिया था। बाद में नगरीय विकास विभाग ने 1998 में यह निर्देश दिए कि कॉक्स कुटीर के समीप स्थित 92 बीघा भूमि न्यास की मानी जाए। इस संबंध में राजस्व विभाग से अंतिम निर्णय होने पर न्यास के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। इसके बाद से नगरीय विकास विभाग को कोई मार्गदर्शन नहीं मिला है। इस संबंध में करीब 30 मामले भी अदालतों में लंबित हैं। इस बीच, सरकार ने संतोषपुरा के नियमन की अनुमति देने के साथ एक बार फिर कॉक्स कुटीर की रिपोर्ट तलब की है।
जमीनी हकीकत
इस भूमि में से 22. 98 बीघा भूमि सड़कों में, 20.35 बीघा भूमि संतोषपुरा कच्ची बस्ती में तथा 13.77 बीघा भूमि बरकतुल्लाह खां स्टेडियम के निर्माण में चली गई है। शेष 34.75 बीघा भूमि अन्य प्रयोजनार्थ उपलब्ध है। इस भूमि में से 20 हजार वर्ग गज भूमि समझौते के रूप में अधिकारदाताओं को देने के लिए न्यास ने 28 अप्रैल 1982 को समझौता किया था।
इसके खिलाफ विजय मेहता ने जनहित याचिका दायर कर दी। इस याचिका पर स्थगन आदेश मिल गया। बाद में राज्य सरकार ने आदेश दिए कि इस स्थगन आदेश को कन्टेस्ट नहीं किया जाए और न्यास को कहा कि स्थगन आदेश यदि निरस्त हो भी जाए तो समझौते पर अमल नहीं किया जाए।
इस याचिका का निस्तारण 1995 को इस आदेश के साथ हुआ कि पक्षकार सक्षम न्यायालय से अनुतोष प्राप्त करने के लिए स्वतंत्र होंगे। कैलाशराज टाटिया के एक अन्य मामले में सिविल कोर्ट ने 1994 में उनके पक्ष में डिक्री पारित कर दी। डिक्री में वर्णित था कि न्यास वादियों को 20 हजार वर्ग गज भूमि से बेदलख नहीं कर सकेगा। न्यास ने इस निर्णय के खिलाफ जिला न्यायालय में अपील की, जिसे न्यास के 1997 के प्रस्ताव की पालना में व्रिडा कर दिया गया।
कहां अटका मामला
न्यास ने 1997 के समझौते की पुष्टि के लिए सरकार को प्रस्ताव भेज दिया था। बाद में नगरीय विकास विभाग ने 1998 में यह निर्देश दिए कि कॉक्स कुटीर के समीप स्थित 92 बीघा भूमि न्यास की मानी जाए।
इस संबंध में राजस्व विभाग से अंतिम निर्णय होने पर न्यास के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। इसके बाद से नगरीय विकास विभाग को कोई मार्गदर्शन नहीं मिला है। इस संबंध में करीब 30 मामले भी अदालतों में लंबित हैं। इस बीच, सरकार ने संतोषपुरा के नियमन की अनुमति देने के साथ एक बार फिर कॉक्स कुटीर की रिपोर्ट तलब की है।