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जज्बे, जुनून और ज़िद की आधी सदी

bhaskar मुझसे अकसर ही बहुत सारे लोग भास्कर समूह की सफलता का रहस्य पूछते हैं। ऐसा होना आश्चर्यजनक भी नहीं।

पुराने भोपाल शहर के कोतवाली क्षेत्र में हैंड कंपोजिग और पुरानी ट्रेडल मशीनों की आवाज के बीच अपनी यात्रा शुरू करके पिछले पचास वर्षो के दौरान समूह के भारत के सबसे बड़े मीडिया हाउस में तब्दील हो जाने के पीछे शायद सबसे बड़ा योगदान यही रहा कि हमने संघर्ष भरे अतीत को कभी अपने से दूर नहीं होने दिया।

हमारी असली ताकत यही रही कि हमने स्वयं को भी सदैव एक पाठक ही माना और अपने असली पाठकों को अपने से कभी अलग नहीं होने दिया। इसीलिए जब गुजरात में हमने ‘दिव्य भास्कर’ की शुरुआत की तो उसका स्लोगन ही बनाया ‘पाठकों की मर्जी का अखबार’। ऐसा दुनिया में और कहीं नहीं हुआ।

हमारी असली ताकत वे लोग बने रहे जिन्होंने संघर्ष के दिनों में हमारा साहस बढ़ाया और ढांढ़स बंधाया। भास्कर भोपाल के पचास साल होने का मौका उन्हीं सब लोगों और अपने पाठकों के प्रति आभार व्यक्त करने का है। इनमें शामिल हैं- हमारे पाठक, विज्ञापनदाता, रचनाकार और वे तमाम लोग जिन्होंने हमें आकाश को छूने की हमारी कोशिशों में भी अपने पैरों को भोपाल की जमीन से जोड़े रखने की प्रेरणा दी।

भोपाल के पाठकों ने आकाश की हमारी उड़ान में हमारे पैरों में ऐसी ताकत भरी और हाथों की ऐसी श्रृंखला बना दी कि हम लगातार बढ़ते चले गए। जितना भी हम आगे बढ़े, भोपाल ने उतने ही हाथ मदद के लिए और आगे बढ़ा दिए।

इसी का परिणाम है कि आज भास्कर समूह के देश भर में हिंदी के 32, गुजराती दिव्य भास्कर के आठ, अंग्रेजी डीएनए के पांच और बिजनेस भास्कर के 11 संस्करणों को मिलाकर कुल 56 संस्करणों में 48 लाख से अधिक प्रतियां नियमित प्रकाशित हो रही हैं।

यह सुखद संयोग ही है कि जब हम अपनी 50वीं वर्षगांठ मना रहे हैं, इसी वर्ष डीएनए के बैंगलूर लांच के साथ समूह 50 लाख प्रतियों को भी पार कर लेगा। समूह का सपना है कि देश के बाद अब वह दुनिया की उन बड़ी मीडिया कंपनियों में शामिल हो, जो करोड़ों पाठकों के साथ जुड़कर देश, समाज और नई पीढ़ी के निर्माण के लिए लगातार काम कर रही हैं।

दुनिया में सारी उपलब्धियां उन्हीं लोगों की झोलियों में आकर गिरीं हैं जिनके पास उन्हें हासिल करने की जिद्द्, जज़बा और जुनून रहा है। हम इसे अपनी खुशकिस्मती और सबसे बड़ी धरोहर मानते हैं कि भास्कर समूह के पास अपने करोड़ों पाठकों, शुभचिंतकों के रूप में आज तीनों ही चीजें मौजूद हैं।

भास्कर भोपाल की स्वर्ण जयंती के अवसर पर मैं सिर्फ यही दोहराना चाहूंगा कि भास्कर सूर्य की तरह सबका है और उसकी किरणों की तरह ही उसके हर विचार पर अधिकार भी सभी का है। उन्नति के पथ पर अग्रसर समाज और देश को हम अपना यथोचित और ईमानदार योगदान दे सकें, ईश्वर से बस यही कामना है।

शुभकामनाओं सहित,
चेयरमैन भास्कर समूह





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