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रोज गटकते हैं बीमारी

भोपाल. भानपुरा क्षेत्र के २५ हजार से ज्यादा लोग ऑइल मिला पानी पी रहे हैं। क्षेत्रीय रहवासियों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि यहां इंडियन ऑइल और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम के स्टोर टैंक बने हैं जिनसे ऑइल लीक होकर जलस्रोतों में मिल जाता है। वहीं पेट्रोलियम कंपनी के अफसर इसे असंभव बता रहे हैं।

डीबी स्टार ने पुष्टि के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की राज्यस्तरीय प्रयोगशाला से क्षेत्र के पानी का परीक्षण करवाया तो उसमें मानक स्तर से चार गुना ज्यादा ऑइल पाया गया।

इसके अलावा इस पानी में बैक्टीरिया की मात्रा 140 पाई गई, जबकि यह शून्य होनी चाहिए। पुराने भोपाल में बसे भानपुरा क्षेत्र के गीता नगर, शिव नगर, प्रीत नगर, कुटील नगर, भंवर नगर, समता नगर, भानपुर गांव, बिहारी कालोनी, लोधी नगर, श्रंगार नगर, कल्याण नगर, शिव नगर, अटल नेहरू नगर, भानपुर और चांदवाड़ी इलाके के रहवासी आठ साल से इस समस्या से परेशान हैं।

सैकड़ों बार शिकायतें हो चुकी हैं, धरनों और प्रदर्शनों की तो गिनती ही नहीं है। अब स्थिति यह है कि लोगों को पानी भी खरीदकर पीना पड़ रहा है, जो ज्यादातर दूषित ही होता है।

निगम की तरफ से पानी की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं होने से बोरिंग मालिकों से ही पानी लेना पड़ता है। ऑइल मिला पानी पेट में जाने से इस क्षेत्र के रहवासियों में खांसी, नजला-जुकाम और खुजली जैसी बीमारियां स्थायी हो गई हैं। बच्चे इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। ऑइल डिपो को अन्यत्र शिफ्ट करने का नोटिस भी दिया जा चुकाहै, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

अफसर बच रहे हैं जवाब देने से
इस बारे में हिन्दुस्तान पेट्रोलियम के डिपो मैनेजर एसके महालक्ष्मीकर से बात करने पर उन्होंने कहा कि मैं जरूरी काम से मुंबई में हूं। आप हमारे कंपनी के चीफ रीजनल मैनेजर एसके भटनागर से बात कर लीजिए। इधर, भटनागर चर्चा के लिए उपलब्ध नहीं हुए। बार-बार पूछने पर उनके कार्यालय के कनिष्ठ कर्मचारियों ने कहा कि वे बाहर गए हुए हैं।

इंडियन ऑइल कॉपरेरेशन के डीजीएम (ऑपरेशन) सुब्रतो भट्टाचार्य ने कहा कि मैं तो नया आया हूं, मुझे कुछ नहीं पता। वैसे इस तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है। कभी कोई टैंक लीक करे और पेट्रोलियम पदार्थ पेयजल में मिल जाए, ऐसा तो पूरे हिन्दुस्तान में नहीं सुना और न ही ऐसा होता है। टैंक की तो डिजाइन ही ऐसी होती है कि वह लीक नहीं हो सकता।

विस्फोट या आग का भी खतरा

इस क्षेत्र में ऑइल का भंडारण है,जो रिस कर क्षेत्र के जलस्रोतों में मिल रहा है। मैंने ट्यूबवेल और पेयजल व्यवस्था के लिए 5 लाख रुपए भी दिए थे, लेकिन ये स्थायी समाधान नहीं था। भंडार के कारण क्षेत्र में विस्फोट या आग लगने की बड़ी घटना का भी खतरा है। पूरे मामले को लेकर शासनस्तर पर कंपनियों की बैठक बुलाई जा चुकी है, जिसमें उन्हें समझाइश दी गई थी। बाद में नगर निगम के माध्यम से भंडारण को शिफ्ट करने का नोटिस भी दिया जा चुका है।
- बाबूलाल गौर , क्षेत्रीय विधायक एवं वाणिज्यिक कर मंत्री

पानी में तेल तो है..

ये सच है कि ऑइल का रिसाव हो रहा है। इसके कारण पानी में हाइड्रोकार्बन की मात्रा लिमिट से अधिक घुल रही है। इसके तीन मुख्य कारण हो सकते हैं-
>> डिपो तक पेट्रोलियम पदार्थो को लाने-ले जाने के लिए जमीन के नीचे बिछी पाइपलाइन में रिसाव हो सकता है।
>> यहां से सैकड़ों टैंकर्स भरे जाते हैं। लोडिंग के समय गिरने वाले पेट्रोलियम पदार्थ रिसकर जमीन में पहुंच जाते हैं।
>> जमीन के भीतर बने स्टोर टैंकों में लीकेज की आशंका है। ये टैंक वर्षो पहले बनाए गए थे।

प्रदूषण ज्यादा भी हो सकता है
जांच रिपोर्ट में यह पानी जितना प्रदूषित बताया जा रहा है, वह उससे भी ज्यादा हो सकता है। इसका सही अंदाजा तब लग सकता है जब सैंपल सुबह लिया जाए, क्योंकि रात को ट्यूबवेल या हैंडपंप नहीं चलाने से पानी स्थिर हो जाता है।

जा सकती है जान भी
हाइड्रोकार्बन की ज्यादा मात्रा पाचन तंत्र को क्षतिग्रस्त करती है। शरीर में गैसें बनने लगती हैं, क्यांेकि पेट्रोल में शीघ्र वाष्पित होने का गुण होता है। इससे उल्टी, पेट खराब होना और एसिडिटी जैसी दिक्कतें होती हैं। इनकी अधिक मात्रा से जान भी जा सकती है।

और ज्यादा जांच की जरूरत
पूरे मामले में सही ढंग से जांच की जरूरत है। प्रदेश शासन को डीबी स्टार सहित अन्य जांच रिपोर्ट के माध्यम से पूरे मामले की शिकायत भारत सरकार को करना चाहिए। इसके अलावा मप्र पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को पानी के 4-5 सैंपल अलग-अलग लैब में टेस्ट करवाना चाहिए। नगर निगम का भी दायित्व है कि पूरे क्षेत्र को स्वच्छ पानी मुहैया करवाए। प्रदूषित जल ग्रहण न करने दे।





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