भोपाल. अब बीए, बीएससी और बीकाम के विद्यार्थियों को डिग्री लेने के बाद किसी भी क्षेत्र में कार्य करने के लिए खास प्रशिक्षण की जरूरत नहीं होगी। ये विद्यार्थी डिग्री के दौरान ही अपनी पसंद के क्षेत्र का काम सीख सकेंगे।
नए सत्र में लागू की गई सेमेस्टर प्रणाली के अंतर्गत कालेजों को हर छात्र को व्यावहारिक कार्य सिखाने की जिम्मेदारी दी गई है। यह कार्य प्रोजेक्ट वर्क के तहत कराए जाएंगे। प्रदेश में इस साल से लागू की गई सेमेस्टर प्रणाली का सबसे ज्यादा लाभ विद्यार्थियों को मिलने वाला है। सरकार ने सेमेस्टर प्रणाली में विद्यार्थियों के लिए हर सेमेस्टर में एक परियोजना कार्य करना जरूरी कर दिया है।
परियोजना कार्र्यो के माध्यम से सरकार छात्रों को डिग्री लेने के बाद रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों की खोज करवाने और उसके लिए जरूरी योग्यता और कौशल प्राप्त करना सिखाने जा रही है। यह परियोजनाएं शासकीय और निजी उपक्रमों मे किए जाने वाले कामों पर आधारित होंगी।
इसके तहत अब कालेजों के विद्यार्थी बैंक, बीमा कंपनियां, अस्पताल, स्कूल प्रबंधन, बीएचईएल, बीएसएनएल, रेडियो, दूरदर्शन, निर्माण, विपणन, पर्यटन, पेपर एजेंसी, रेलवे जैसी कई सरकारी और निजी संस्थाओं की कार्यप्रणाली पढ़ाई के दौरान ही सीख सकेंगे। इस व्यवस्था से छात्र स्वयं को रोजगार पाने के लिए अधिक कुशल और योग्य साबित कर सकेंगे।
इसके साथ ही संबंधित क्षेत्रों में रोजगार पा लेने के बाद काम समझने और करने में आसानी होगी। सरकार ने रोजगार के एक हजार से ज्यादा क्षेत्रों और विषयों की सूची कालेजों को सौंपी है। जाहिर है अब छात्रों के सामने विकल्प की कमी नहीं है। वे अपनी पसंद के क्षेत्र का काम चुन कर उस पर प्रोजेक्ट बना सकते हैं। हर सेमेस्टर की परीक्षाओं में इस कार्य के लिए 50 अंक भी तय किए गए हैं।
कालेजों ने की तैयारी: सरकार के इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए कालेजों ने भी अपने स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्राचार्र्यो ने शिक्षकों को छात्रों के प्रोजेक्ट बनवाने पर गंभीरता से ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। संत हिरदाराम कालेज ने आईआईएम से जुड़ी एक संस्था को पहले सेमेस्टर से ही छात्राओं को विशेष प्रशिक्षण दिलवाने का करारनामा किया है, वहीं लेखा और वित्त विषय की छात्राओं को कालेज स्टाफ के आयकर का ब्यौरा तैयार करवाना और पेन कार्ड बनवाने जैसे कामों की जिम्मेदारी दी जा रही है।
निदेशक शशि राय का कहना है कि यह उनका प्रोजेक्ट भी होगा और अनुभव भी। उच्च शिक्षा आयुक्त आशीष उपाध्याय कहते हैं कि डिग्री पाठ्यक्रमों की उपयोगिता बढ़ाने और स्नातकों को रोजगार के लिए तैयार करने यह व्यवस्था शुरू की गई है। इसका सख्ती से पालन करवाया जाएगा।
विवि ने की तैयारी: बरकतउल्ला विश्वविद्यालय ने इस संबंध में तैयारी शुरू भी कर दी है। यहां दूरस्थ शिक्षा पाठ्यक्रमों में ग्रामीण क्षेत्रों के रोजगार मूलक विषयों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। कुलपति भूपाल सिंह ने भी विवि के दूरस्थ शिक्षा पाठ्यक्रमों में आंगनबाड़ी संचालन, सहकारी संस्था प्रबंधन, कुटीर उद्योगों की स्थापना जैसे विषयों पर परियोजना कार्य करवाने के लिए संबंधित शिक्षकों और अधिकारियों को मुस्तैद रहने के लिए कह दिया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले युवक-युवती भी उच्च शिक्षा के प्रति आकृष्ट होंगे।
यह होंगी चुनौतियां
>> प्रोजेक्ट के साथ व्यक्तित्व विकास के लिए भी पर्याप्त प्रबंध करने होंगे।
>> कालेजों में शिक्षकों की संख्या बढ़ानी होगी।
>> विद्यार्थियों को पारंगत बनाने पर्याप्त संसाधन जुटाने होंगे, जिसके लिए कालेजों की माली हालत ठीक करनी होगी।
>> कालेज शिक्षकों को परंपरागत तरीका छोड़ कर इनोवेटिव होना होगा।
इन क्षेत्रों में होंगे पारंगत
बैंको और बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली और संचालन,अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र की प्रबंध व्याख्या,सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों बीएसएनएल,बीएचईएल, आईओसी जैसे कार्यालयों में रोजगार के अवसर तलाशना,बड़े और कुटीर उद्योगों की संगठन व्यवस्था और संचालन,समाचार पत्र प्रकाशन और वितरण, मनोरंजन के क्षेत्र रेडियो,दूरदर्शन,विज्ञापन कंपनियां आदि की कार्यप्रणाली स्थानीय मंडी के थोक और फुटकार व्यवसाय का अध्ययन,क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थानों की प्रशासनिक, लेखा, संगठन आदि का अध्ययन, आधुनिक तरीकों से खेती में नवाचार,स्वरोजगार के सैकड़ों विषयों में से चुन कर पसंदीदा का अध्ययन, र्न्िसग होम के संचालन और प्रक्रियाओं का अध्ययन।