विकास मंत्र. यदि आपको अपने किसी नजदीकी व्यक्ति के प्रति किसी भी तरह का कोई भी संदेह है, चाहे वह छोटा सा ही क्यों न हो, तो उसे दूर कर लेना चाहिए।
हम अक्सर करते यह हैं कि या तो उसे ज्यादा तरजीह नहीं देते या फिर संकोच के कारण कि ‘पूछें तो कैसे पूछें’ उसे टालते रहते हैं। बाद में यही छोटा सा संदेह हमारे संबंधो में खराश का सबसे बड़ा कारण बन जाता है। अब यह बात दीगर है कि हम अन्य बहुत सी दूसरी बातों को इस खटास का कारण समझते रहते हैं। दरअसल ‘डाउट्स’ चश्मे होते हैं, जो एक बार यदि हमारे दिमाग की आंखों पर चढ़ गए तो तब तक उतरने का नाम नहीं लेते, जब तक कि आप उन्हें खुद उतारें नहीं। अब आप जब भी उस खराश को देखेंगे, इसी चश्मे के जरिए देखेंगे और वही कुछ देखेंगे जो यह चश्मा आपको दिखाएगा।
जाहिर है कि आप उसे ठीक से समझ नहीं सकेंगे। उसके प्रति आपके मन में संदेह का जो घुन घुस गया है वह धीरे-धीरे आपको अनजाने में ही, आपकी चेतना को कुतर-कुतरकर अंदर से पोला और बाहर से संकुचित बना देगा। फिर आप न तो उससे दिल खोलकर मिल पाएंगे और न ही पूरी तरह मुंह खोलकर बोल पाएंगे। हालांकि ऐसा आप जान बूझकर नहीं करेंगे।
संदेह के इस धीमे जहर से छुटकारा पाने के दो मुख्य मंत्र हैं या तो आप पक्के तौर पर खुद ही सोच लीजिए कि ‘नहीं ऐसा नहीं हो सकता’ या फिर आप उससे इस मुद्दे पर अच्छी तरह बातचीत करके जान लीजिए कि सही बात क्या है। यदि आपका संदेह सही निकला तो भी आपको उस घुन से छुटकारा मिल जाएगा। इससे छुटकारा पाना ही चाहिए।
-लेखक समय एवं जीवन प्रबंधन के विशेषज्ञ हैं।