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‘सत्य अहिंसा में मन हुआ मगन’

इंदौर. सत्याग्रह याने प्रेम से समाज में परिवर्तन कर नई ताकत खोजना। गांधीजी ने सत्याग्रह के लिए तीन पर्यायवाची शब्द का उपयोग किया वह है सत्य की शक्ति, प्रेम की शक्ति व आत्मा की शक्ति। गांधीजी का विचार कर्म के लिए प्रेरणा देने वाला है, वह केवल अध्ययन करने तक ही सीमित नहीं है।

यह बात प्रख्यात गांधीवादी नारायणभाई देसाई ने कस्तूरबा ट्रस्ट द्वारा बास्केटबॉल कॉम्प्लेक्स में आयोजित बापूकथा के चौथे दिन कही। बापूकथा की शुरुआत ‘लागी रे लगन, सत्य अहिंसा में मन हुआ मगन..’ गीत से हुई। उन्होंने कहा बापू की प्रासंगिकता के बारे में हम घर में ही संदेह करते हैं जबकि उन्हें राष्ट्रपिता कहते हैं। प्रासंगिकता दो चीजों पर निर्भर करती है आवश्यकता और सत्यता।

आवश्यकता परिस्थितियों पर निर्भर करती है और सत्यता आप व हम पर। विश्व की स्थिति को देखें तो शांति की सबको आवश्यकता है, इसकी प्राप्ति के लिए इन दिनों सभी देश व शक्तियां चिंतित हैं। श्री देसाई ने बाबा साहेब आंबेडकर, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, शहीद भगतसिंह के गांधीजी के साथ रोचक संस्मरण पर भी प्रकाश डाला।

कथा शुभारंभ के पहले दैनिक भास्कर के महाप्रबंधक एच.एस. चुघ, पत्रकार अभय छजलानी, अन्ना दुराई, कुट्टी मेनन, कृष्णकुमार अष्ठाना आदि ने स्वागत किया। गुरुसिंघ सभा के अध्यक्ष गुरदीपसिंह भाटिया सभा के पदाधिकारियों के साथ सिरोपा भेंट किया। आयोजन समिति की ओर से मुकुंद कुलकर्णी, ओमप्रकाश नरेडा, पंकज संघवी आदि ने अतिथियों की अगवानी की। संचालन संजय पटेल ने किया।

फांसी रुकवाने के लिए किए थे छह प्रयास- श्री देसाई ने कहा शहीद भगतसिंह, सुखदेव और चंद्रशेखर आजाद की फांसी रुकवाने के लिए गांधीजी ने छह बार प्रयास किए लेकिन फांसी नहीं रुक पाई।

बापू कथा का समापन 13 अगस्त को होगा। इस दिन शाम 5.30 बजे से देश के विभाजन की तस्वीर व अविस्मरणीय प्रंसगों का भावपूर्ण चित्रण होगा। हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल वी.एस. कोकजे के मुख्य आतिथ्य में श्री देसाई का अभिनंदन भी होगा।

संतों के माध्यम से महाभारत व रामायण के प्रसंग कथा के माध्यम से सुने। अब गांधी कथा, यह चमत्कार है, युग की आवश्यकता की पूर्ति हुई है।
- रमेश मंगल

देशभर में यदि बापू कथा पढ़ाई जाए तो जन-जन तक अहिंसा की बात पहुंचेगी। देश में आज जो हिंसाएं हो रही है वह शांति में बदल जाएगी।
- रघुवीरसिंह खनूजा

महात्मा गांधी की दांडी यात्रा ने कमोवेश पूरे विश्व का भविष्य तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- चिन्मय मिश्र

गांधीजी के बारे में बताया गया उनमें से कई शायद इतिहास के पन्नों में भी नहीं हैं। गांधीजी की यह कथा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी व आवश्यक है।
- इंजीनियर ए.के. सोजतिया





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