इंदौर. पुनर्गठन के तहत मध्यप्रदेश से मार्च 07 में भेजे गए हाउसिंग बोर्ड के 50 कर्मचारी-अधिकारियों को छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने लौटा दिया।
उसका कहना है मप्र से 17 करोड़ रुपए मिलेंगे तो ही इन्हें लिया जा सकेगा। अब इन अधिकारी-कर्मचारियों के लिए दोहरी मुसीबत हो गई है क्योंकि यहां से जुलाई का वेतन देने से मना कर दिया गया।
म.प्र. हाउसिंग बोर्ड के आयुक्त वसीम अख्तर ने स्वीकार किया कि कर्मचारी लौट आए हैं। इससे केंद्र सरकार को अवगत करा दिया गया है जिसके आदेश का इंतजार है। श्री अख्तर का कहना है केंद्र सरकार के आदेश पर ही कर्मचारियों को जुलाई में रिलीव किया था। केंद्र द्वारा छग को कहा जा चुका है कि सेवाएं और देनदारी दोनों अलग मुद्दे हैं। कर्मियों की सेवाएं लेना पड़ेंगी।
वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पुनर्गठन अधिनियम 2000 के तहत हुए वर्ष 2002 में एमओयू के तहत म.प्र. बोर्ड के 50 अधिकारी- कर्मचारियों को वर्तमान वेतनमान पर छग भेजने का निर्णय हुआ था। यह भी तय हुआ था कि बैलेंसशीट के मुताबिक म.प्र. हाउसिंग बोर्ड छग बोर्ड को 16 करोड़ 95 लाख रुपए देगा।
दो बार लौटाया
म.प्र. हाउसिंग बोर्ड ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को अधिकारी- कर्मचारियों के लौटाने से अवगत कराया था। इस पर गृह मंत्रालय ने 26 मई 08 को आदेश दिए कि देनदारी के कारण सेवाएं नहीं रोकी जा सकतीं।
इस कारण छग बोर्ड म.प्र. से भेजे गए कर्मियों को स्वीकार करे। इसी आदेश के परिप्रेक्ष्य में म.प्र. बोर्ड ने जुलाई 08 के दूसरे पखवाड़े में अधिकारी-कर्मियों को दोबारा रिलिव किया था किंतु फिर लौटा दिया गया। सूत्रों के अनुसार छग सरकार के एडीशनल चीफ सेक्रेटरी ने 22 जुलाई 08 को गृह मंत्रालय नई दिल्ली को बताया था कि पैसे नहीं मिलने से कर्मियों को ज्वाइन नहीं कराया जा सकता।
अब तक नहीं मिला वेतन
प्रदेशभर के 50 कर्मियों में 10 अधिकारी-कर्मचारी इंदौर वृत्त के भी हैं। लौटने के बाद जब ये अपने-अपने दफ्तर गए तो उन्हें वेतन देने से इंकार कर दिया और कहा अब वे उनके कर्मचारी नहीं हैं।
कार्यपालन यंत्री इंदौर आरके निगम का भी इस सूची में नाम है। उनका कहना है वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों को खाने के लाले पड़ जाएंगे। कुछ दिन इंतजार के बाद कानून की शरण ली जाएगी।