मुंबई. बैंकों ने अब बढ़ते डूबत या खराब कर्जो की समस्या पर गौर करना शुरू कर दिया है। क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन के डिफाल्टर बैंकों के लिए सिरदर्द साबित हो रहे हैं। अगले पांच वर्र्षो में इन बैंकों के लिए डूबत ऋण बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं। कुछ विदेशी और निजी बैंकों में भी डिफाल्ट के मामले बढ़ने की बात देखी जा रही है।
एबीएन एमरो बैंक, भारत की कंट्री एक्जीक्यूटिव मीरा सान्याल ने कहा है कि बैंक के क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन सेगमेंट में डिफाल्ट (ग्राहकों द्वारा भुगतान में चूक) के मामलों में कुछ बढ़ोतरी हुई है, लेकिन मीडियम टर्म का आकलन सकारात्मक बना हुआ है।
एचएसबीसी इंडिया की कंट्री हेड नैना लाल किदवई भी इस बात से सहमत है। किदवई के अनुसार क्रेडिट कार्ड, कंज्यूमर फायनेंस, पर्सनल लोन और मोर्टगेज में चूक के मामले हो सकते हैं। खुदरा लोन की प्रगति दर भी धीमी हो सकती है।
बैंकों ने कंज्यूमर फायनेंस और ऑटो लोन देना पहले ही बंद कर दिया है। शर्ते भी सख्त कर दी हैं। देश में खुदरा ऋण देने के मामले में अग्रणी आईसीआईसीआई बैंक पिछले कुछ सालों में अच्छी बढ़त दर्ज कराने के बाद इस साल खुदरा ऋणों के 5-10 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद कर रहा है।
आईसीआईसीआई बैंक की जेएमडी और सीएफओ चंदा कोचर कहती हैं कि कापरेरेट क्रेडिट ग्रोथ 16 फीसदी रह सकती है। वे इस बात से इनकार करती हैं कि ऊंची ब्याज दरों का बैंक के लोन पोर्टफोलियो पर बुरा असर पड़ेगा। बैंक सेक्टर का विकास भले ही प्रभावित हो। लेकिन आईसीआईसीआई बैंक का लोन प्रभावित नहीं होने वाला है।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बैंकों की शुद्ध अनर्जक परिसंपत्तियां 1.74 फीसदी हो गई। बीते वर्ष की समान तिमाही में यह 1.33 फीसदी थीं। विश्लेषकों का कहना है कि 2009 से भारत में कायर्रत विदेशी बैंकों के लिए नियम उदार किए जाने हैं। आने वाले समय में घरेलू बैंकों के लिए डूबत ऋण बड़ी चुनौती साबित होंगे।
चरम पर ब्याज दरें: एसबीआई प्रमुखदेश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन ओपी भट्ट ने कहा है कि ब्याज दरें चरम पर पहुंच चुकी हैं। जब तक रिजर्व बैंक और कोई उपाय नहीं करता है, इसमें बढ़ोतरी की संभावना नहीं है।