नई दिल्ली.
निकट भविष्य में आपको बढ़ती कीमतों से कोई राहत मिलने वाली नहीं। दूसरी तरफ देश की विकास दर में जबर्दस्त कमी आने वाली है। यह रिजर्व बैंक के अनुमान से भी कम होने वाली है।
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति (ईएसी) का कहना है कि मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 13 फीसदी तक जा सकती है और विकास दर खिसककर 7.7 फीसदी पर आ सकती है।
कैसे घटे कीमतें: वर्ष 2008-09 के आर्थिक अनुमान जारी करते हुए रंगराजन ने कहा कि नीतियों में बेहतर तालमेल रहा तो मुद्रास्फीति को मार्च 2009 में 8-9 फीसदी पर लाया जा सकता है।
..और बढ़ेंगी दरें: रंगराजन ने कहा कि जहां तक रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति का सवाल है जब तक मुद्रास्फीति काबू में नहीं आती सख्त नीतियां जारी रहनी चाहिए।
धीमी पड़ेगी विकास दर: रंगराजन ने विकास दर का अनुमान 9 फीसदी से घटाकर 7.7 फीसदी पर लाने को उचित ठहराया। रंगराजन ने कहा कि कृषि, उद्योग और सेवा उद्योगों में धीमापन आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय वातावरण उद्योगों की प्रगति के अनुकूल नहीं है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा।
जुलाई की कमजोर बारिश का असर: ईएसी का कहना है कि कृषि की विकास दर केवल 2 फीसदी रहने वाली है। इसका मतलब है कि देश में खाद्य पदार्थो की कीमतें भविष्य में और बढ़ सकती हैं। 2007-08 में कृषि क्षेत्र की विकास दर 4.5 फीसदी रही थी।
जुलाई में मानसून कमजोर रहने का भी कुछ असर माना जा रहा है। जुलाई में बारिश कमजोर रहने के कारण खरीफ की फसल पर असर पड़ता है। रंगराजन का कहना है कि खरीफ के खाद्यान्न का उत्पादन पिछले वर्ष के समान रह सकता है। रबी के उत्पादन में इजाफा हो सकता है।
कौन सही?
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार समिति ने जहां देश की विकास दर का आंकड़ा घटाकर 7.7 फीसदी कर दिया है, वित्तमंत्री पी चिदंबरम को मार्च 2008 में समाप्त वर्ष में 8 फीसदी का अनुमान है।
रिजर्व बैंक ने 29 जुलाई को मौद्रिक नीति की समीक्षा में 8 फीसदी विकास दर रहने का अनुमान जाहिर किया था। रंगराजन की समिति ने पहले विकास दर 8-8.5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था।
कर्ज दर बढ़ेगी : चिदंबरम को उम्मीद है कि कर्ज बांटने की दर 20 फीसदी बढ़ेगी। वित्तमंत्री ने बैंक प्रमुखों की बैठक के बाद कहा इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रोजेक्ट फाइनेंस और विस्तार के लिए कर्ज की मांग घटी नहीं है।
खपत से जुड़े कर्ज की दर कुछ प्रभावित हुई है। होम लोन की मांग पहले की तरह तेज बनी रहेगी। बल्कि चिदंबरम का कहना है कि बैंकों के कर्ज की गुणवत्ता बढ़ गई है यानी खराब लोन की मात्रा कम हुई है। डिपाजिट भी संतोषजनक दर से बढ़ रहे हैं। उधार की लागत बढ़ने से बैंकों के मुनाफों पर असर हुआ है।