भोपाल. भोपाल के मास्टर प्लान के बहाने भास्कर ने प्रदेश के दूसरे शहरों की स्थिति की पड़ताल की तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। प्रारूप प्रकाशन, दावे-आपत्तियां आमंत्रित कर उनके निराकरण से लेकर दूसरी तमाम औपचारिकताओं के बाद भी मास्टर प्लान लागू होने का इंतजार कर रहे हैं।
हरदा के मास्टर प्लान का डेढ़ साल बाद भी अनुमोदन नहीं हो पाया है। वजह- शासन की हरी झंडी नहीं मिलना। शासन से अनुमोदन के बाद राजपत्र में अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से ही मास्टर प्लान लागू होता है।
किसी तरह की पेचीदगी नहीं हो तो शासन स्तर पर देर नहीं होती, लेकिन तकनीकी कमी के आधार पर मामला लंबित हो जाता है। जमीनों के उपयोग परिवर्तन के प्रस्तावों और उनसे जुड़े प्रभावी लोगों के हितों की वजह से भी देरी होती है। हालांकि मास्टर प्लान की प्रत्येक प्रक्रिया को लेकर समय निर्धारित है, लेकिन शासन से अनुमोदन को लेकर कोई समय सीमा तय नहीं है।
यही कारण है कि बड़े शहरों के मास्टर प्लान अटक जाते हैं। सूत्रों के अनुसार आवास एवं पर्यावरण मंत्रालय में अमले की कमी भी एक वजह है। तकनीकी परीक्षण के लिए सिर्फ एक उपसचिव है। अकेले उन पर ही प्रदेशभर के शहरों के मास्टर प्लान की फाइल आगे बढ़ाने का जिम्मा है।
इन्हें है अनुमोदन का इंतजार
जिन शहरों के मास्टर प्लान का सिर्फ शासन से अनुमोदन होना बाकी है उनमें हरदा, रायसेन, मुरैना, आष्टा, बैरसिया, छतरपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सीधी, नरसिंहगढ़, अशोकनगर, सिवनी, अलीराजपुर, दतिया शामिल हैं।
मास्टर प्लान के अनुमोदन की एक निश्चित प्रक्रिया है। शासन को मास्टर प्लान प्राप्त होने के बाद उसका परीक्षण किया जाता है जिसके बाद ही अनुमोदन की कार्यवाही होती है।
- आलोक श्रीवास्तव, सचिव, आवास एवं पर्यावरण विभाग
इन शहरों के लिए चल रहा है काम
रीवा, बुरहानपुर, सतना, रतलाम, अनूपपुर के मास्टर प्लान के प्रारूप की तैयारी लगभग पूरी हो गई है। फिलहाल नगर तथा ग्राम निवेश विभाग संचालनालय स्तर कार्यवाही चल रही है। बुधनी, गाडरवाड़ा भेड़ाघाट, खुरई, नागदा, गरोठ, सेंधवा, सोनकच्छ, सौंसर, मंडीदीप, मुलताई, ब्यावरा, डिंडोरी व अंबाह में जिला स्तर पर काम चल रहा है। डबरा के मास्टर प्लान को लेकर दावें-आपत्तियों की सुनवाई हो चुकी है।