भोपाल. स्कूल शिक्षा विभाग ने महज पांच माह में सरकारी स्कूलों के बच्चों का ‘आईक्यू’ समान करने का बीड़ा उठाया है। दक्षता संवर्धन कार्यक्रम के तहत ‘बच्चों को हिंदी समझना’ और ‘गणित हल करना’ सिखाया जाएगा। इसमें 90 फीसदी सफलता प्राप्त करने वाले शिक्षक को पुरस्कृत किया जाएगा।
राज्य शिक्षा केंद्र ने योजना का खाका तैयार कर लिया है। इसके माध्यम से प्राइमरी स्कूलों के विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमताओं का विकास किया जाना है। इसके लिए मापदंड तय किए गए हैं और शिक्षकों को प्रशिक्षित करने ट्रेनिंग शुरू हो गई है। फिलहाल राज्य स्रोत समूह और जिला स्रोत समूह के लिए दो चरणों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इसके बाद जिला व विकासखंड स्तरीय समूहों को ट्रेनिंग दी जाएगी। यह पूरी योजना फिल्म ‘तारे जमीं पर’ देखकर तैयार की गई है।
होगी मानीटरिंग : स्कूलों में प्रधानाध्यापकों को योजना की मानीटरिंग का दायित्व सौंपा जा रहा है। वे रोज कक्षाओं में जाकर बच्चों से सवाल-जवाब करेंगे और प्रत्येक शनिवार को योजना की कक्षा और शिक्षकवार समीक्षा करेंगे।
योजना का उद्देश्य
>> बच्चों को निश्चित समय सीमा (फरवरी 09 तक) में मूलभूत दक्षताएं हासिल कराना है।
>> समुदाय एवं शिक्षकों को प्रोत्साहित किया जाएगा।
>> स्कूल जाने योग्य पांच से 14 वर्ष के बच्चों की शिक्षा में गुणवत्ता पर ध्यान देना।
>> स्कूलों में सभी बच्चों का नामांकन एवं उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना।