इंदौर. रक्षाबंधन पर इस बार चंद्रग्रहण का साया है। ग्रहण का सूतक शाम से लग जाएगा, इससे पहले सुबह भद्रा है। भद्रा और ग्रहण के सूतक में रक्षासूत्र बांधने को लेकर असमंजस है। हालांकि पंडितों का कहना है सूतक में रक्षासूत्र बांधा जा सकता है लेकिन भद्रा में नहीं। एक पखवाड़े में यह दूसरा मौका है जब सूर्य के बाद चंद्रग्रहण आया। वैसे तो रक्षाबंधन पर 56 साल में पांच बार चंद्रग्रहण आया है।
16-17 अगस्त की दरमियानी रात भारतीय भूकेंद्र पर 1.06 पर चंद्रग्रहण लगेगा। इसका सूतक 16 अगस्त को दोपहर 3.50 बजे लग जाएगा। इसके पहले सूर्योदय से लेकर दोपहर 2.36 बजे तक भद्राकाल है। पंडितों के अनुसार रक्षाबंधन पर 5 अगस्त 1952, 6 अगस्त 1971, 6 अगस्त 1990, 28 अगस्त 2007 के बाद अब 16 अगस्त को चंद्रग्रहण है। 9 साल बाद 2017 में रक्षाबंधन पर चंद्रग्रहण आएगा।
अपराह्न् काल सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त
मध्यप्रदेश ज्योतिष परिषद के अध्यक्ष पं. रामचंद्र शर्मा ‘वैदिक’ के मुताबिक रक्षाबंधन पर भद्रा व ग्रहण का योग सौ वर्ष के अंतराल में दूसरी बार बन रहा है। अत: दोपहर 2.37 से अपराह्न् 3.54 बजे तक का मुहूर्त सबसे श्रेष्ठ होगा। इस दौरान न सूतक की अड़चन है न भद्रा की। चौघड़िया भी लाभ-अमृत का होगा। एक घंटे 17 मिनट का यह समय राखी बांधने के लिए श्रेष्ठ रहेगा। ज्योतिषाचार्य पं. आनंदशंकर व्यास के मुताबिक 15 दिन के अंतराल में दो ग्रहण होना शुभ नहीं है। इसके पूर्व 1 अगस्त को सूर्यग्रहण हुआ था।
ग्रहण का स्पर्श, मध्य और मोक्ष
ग्रहण का स्पर्श 16-17 की रात 1.06 बजे होगा जबकि मध्य 2.40 बजे और मोक्ष सुबह 4.15 बजे होगा। ग्रहण का पर्वकाल 3 घंटे 09 मिनट रहेगा। ग्रहण के स्पर्श के समय स्नान, मध्य में मंत्र जाप और मोक्ष के समय स्नान और उसके बाद दान का विशेष महत्व है। ग्रहण के समय किया गया मंत्र जाप का फल अनंत गुना मिलता है।
धर्मसिंधु के अनुसार
धर्मसिंधु के अनुसार- इदं ग्रहण संक्रांति दिनेùपि कर्तव्यम् - अर्थात रक्षाबंधन में संक्रांति दिन व ग्रहण पूर्व काल विचार नहीं किया जाता। पंचांगकर्ता प्रो. प्रियव्रत शर्मा के अनुसार राखी श्रावणी उपाकर्म अपराह्न् में किया जाता है। भद्रा में रक्षासूत्र नहीं बांधा जा सकता। इस वर्ष पूर्णिमा पर 2.36 बजे तक भद्रा है। अत: रक्षाबंधन का सर्वश्रेष्ठकाल 2.36 से शाम 4.24 बजे तक है। खरगोन के पं. मधुसूदन ठक्कर के मुताबिक ग्रहण के सूतक में रक्षा सूत्र बांधा जा सकता है लेकिन भद्राकाल में राखी नहीं बांधी जा सकेगी।