जयपुर. राजस्थान विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित पीएमईटी 2008 (एमएड प्रवेश परीक्षा) में 34 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले आरक्षित वर्ग और महिला अभ्यर्थियों को एमएड में प्रवेश का मौका मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा जनरल श्रेणी का भी 38 प्रतिशत अंक में चयन हो सकता है। इसके पीछे कारण यह है कि इस बार परीक्षा परिणाम अच्छा नहीं रहा। इससे पूर्व एमएड की प्रवेश परीक्षा में 40 प्रतिशत कट ऑफ मार्क्स निर्धारित किए गए थे।
पेपर टफ था, आधे अभ्यर्थी हुए फेल : राजस्थान विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के अध्यक्ष प्रो. मथुरेश्वर पारीक ने स्वीकार किया है कि इस बार एमएड प्रवेश परीक्षा का पेपर टफ था। इसी का कारण है कि आधे से ज्यादा अभ्यर्थी 40 प्रतिशत अंक तक नहीं जुटा सके। एमएड की इस प्रवेश परीक्षा में कुल 20 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इसमें से केवल 16 हजार ही परीक्षा में बैठ सके।
शुरुआत की चैकिंग में आधे से ज्यादा अभ्यर्थियों के 40 प्रतिशत से कम अंक आए हैं, जिसे प्राथमिक चैकिंग में फेल का दर्जा दिया गया है। इस बार कट पाइंट में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करने की अनिवार्यता में शिथिलता दी गई है। शिथिलता कितनी देनी है। इस संबंध में सोमवार तक निर्णय हो जाएगा। सितम्बर में काउंसलिंग होगी। इसलिए सीटें बढ़ने की संभावनाएं है।
-प्रो. मथुरेश्वर पारीक, विभागाध्यक्ष, शिक्षा विभाग, राज.विवि.
सीटें बढ़ने की उम्मीद
एमएड प्रवेश परीक्षा में राजस्थान विश्वविद्यालय ने 610 सीटें निर्धारित की थीं। सितम्बर तक काउंसलिंग का समय निर्धारित हुआ है। विश्वविद्यालय के अधिकृत सूत्रों का कहना है कि एनसीटीई द्वारा कॉलेजों को मान्यता देने की प्रक्रिया चल रही है। इससे एमएड सीटों की संख्या बढ़ेगी।