भोपाल.
दैनिक भास्कर के पास हिंदुस्तान की सर्वश्रेष्ठ टीम है, जो किसी भी चुनौती का मुकाबला करने में सक्षम है। हममें संघर्ष का साहस है और अखबार की मशाल जिन हाथों में है, वे उसे और तेज रफ्तार से आगे ले जाएंगे। हमारे पास जज्बा है, जोश है, जुनून है और हर मुश्किल में आगे बढ़ने की जिद भी।
यह बात भास्कर समूह के चेयरमैन रमेशचंद्र अग्रवाल ने दैनिक भास्कर के भोपाल संस्करण की स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित एक आत्मीय आयोजन में कही। भास्कर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने 50 साल के सफर से जुड़े अनुभव अपनों के बीच बांटे।
नई पीढ़ी के साथियों से मुखातिब होकर रमेशजी ने कहा कि पहले न आज जैसे साधन थे, न सुविधाएं, बस आगे बढ़ने का जज्बा और मन में दृढ़ता थी। उस दौर में अखबार को हमने एक ऐसे माध्यम के रूप में देखा, जहां रहकर आप समाज के लिए कुछ कर सकते हैं। काफी संघर्र्षो से गुजरना पड़ा। धीरे-धीरे एक टीम बनती गई।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने के लिए भास्कर ने अपने कठिन सफर में कभी समझौता नहीं किया और संपादकीय स्वतंत्रता को सर्वोपरि रखा। हम निडर होकर आगे बढ़े और यही अखबार की ताकत है।
उन्होंने कहा कि संघर्ष के दिनों में भी भास्कर ने धन कमाने के अनुचित साधनों से तौबा की और यह सबक लिया कि लक्ष्मी आए जरूर लेकिन नारायण के साथ आए, उल्लू के साथ नहीं। अगर नारायण के साथ लक्ष्मी का प्रवेश होगा तो घर और संस्थान में सुख, शांति व समृद्घि बनी रहेगी। उन्होंने धन की नश्वरता को रेखांकित करते हुए कहा कि पैसे की अपनी सीमाएं हैं। अकेला पैसा जिंदगी में कुछ नहीं कर सकता।
अगर बेटे-बहू नालायक निकल जाएं तो पैसे का क्या कीजिएगा? इसलिए धन उचित मार्ग से ही आना चाहिए और इसके अहंकार से हर हाल में बचना चाहिए। इसके साथ ही समाज के प्रति अपने दायित्व भी पूरे करने चाहिए। रमेशजी ने विश्वास व्यक्त किया कि उन्होंने भास्कर की मशाल दक्ष टीम के हाथों में सौंप दी है और यह टीम दुनिया की किसी भी चुनौती का सामना करने में सक्षम है, जो अखबार को और आगे ले जाएगी।
उन्होंने भास्कर के साथियों को नए सपने देखने की सीख देते हुए कहा कि उज्ज्वल भविष्य के लिए सपने देखना जरूरी है। इस अवसर पर रमेशजी ने भास्कर के पुराने और मौजूदा 56 वरिष्ठ साथियों को शॉल, श्रीफल व प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया।