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International International इस्लामाबाद. पाकिस्तान के सत्तारूढ़ गठबंधन ने राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ द्वारा की गई सुलह की अपील यह कहकर ठुकरा दी है कि तानाशाही को शिकस्त देने के लिए लोकतांत्रिक ताकतें एकजुट हो गई हैं। मुशर्रफ द्वारा अपने विरोधियों से राजनीतिक सुलह की इच्छा जताने के कुछ ही घंटों बाद प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने उनसे सुलह न करने का संकेत दिया।
गिलानी ने पाकिस्तान की आजादी की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में मुशर्रफ का नाम लिए बगैर कहा कि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक ताकतें तानाशाही को शिकस्त देने के लिए एकजुट हैं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि उनकी सरकार देश से आतंकवाद का खात्मा और कबाइली इलाकों में कानून की बहाली के साथ ही लोगों की आर्थिक समृद्धि पर जोर देगी।
सुलह की पेशकश :
गिलानी के उद्बोधन से पहले मुशर्रफ ने पाकिस्तान की आजादी के मौके पर एक टीवी कार्यक्रम में देश की आर्थिक मंदी और सुरक्षा का हवाला देते हुए सभी राजनीतिक दलों से सुलह की पेशकश की थी।
देश पर संकट :
गिलानी ने कहा कि आतंकवाद, मंहगाई और बेरोजगारी जैसी समस्याओं की वजह से देश संकट में है। गरीबी आतंकवाद की मूल वजह है।न्यायपालिका को पूरी आजादी देना एक सपना है और इसे जल्द ही अमली जामा पहनाया जाएगा।
शांति की प्रतिबद्धता :
गिलानी ने कहा कि उनकी सरकार भारत के साथ बेहतर रिश्ते बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और दोनों देशों के बीच सभी विवादों का समाधान सिर्फ शांतिपूर्ण ढंग से ही संभव है।
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेजे अपने एक विशेष संदेश में गिलानी ने कहा है, ‘आपको (मनमोहन) और भारत की जनता को भारत की आजादी की मुबारकबाद देना मेरे लिए खुशी की बात है।’
संघर्ष विराम उल्लंघन बाधा :
गिलानी ने अपने उद्बोधन में कहा कि पाकिस्तान कश्मीर समस्या के समाधान के लिए पूरी तरह प्रयास करता रहा है, लेकिन नियंत्रण रेखा पर युद्ध विराम का उल्लंघन शांति प्रक्रिया में बाधा है। गिलानी ने अपने संबोधन में कहा कि उन्होंने इस समस्या से मनमोहन सिंह को कोलंबों में सार्क सम्मेलन के दौरान अवगत कराया था।