नई दिल्ली.देश के कई भागों में प्रापर्टी बाजार में आए बूम के पीछे जाली नोटों की भूमिका हो सकती है। अधिकारियों के मुताबिक, रियल इस्टेट के सौदों में 30 से 60 फीसदी राशि ‘ब्लैक मनी’ होती है और इसका बड़ा हिस्सा जाली मुद्रा हो सकती है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार केरल, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक में जाली नोटों के साथ पकड़े गए लोगों ने स्वीकार किया है कि उन्होंने इस धन से जमीनें भी खरीदी हैं।
खुफिया सूचनाओं में बताया गया है कि पश्चिमी तटवर्ती इलाकों में दाऊद इब्राहिम और अन्य गैंगस्टरों ने बड़े पैमाने पर बेनामी निवेश किया है। सूत्रों के मुताबिक हो सकता है कि इस निवेश का एक बड़ा हिस्सा जाली नोटों के जरिए किया गया हो।
वहीं, सुरक्षा विभाग के सूत्र बताते हैं कि वित्तीय सौदों में पारदर्शिता और प्रशासन की सहभागिता लाए बगैर वे खामियां दूर नहीं की जा सकतीं, जिनके जरिए जाली मुद्रा व्यवस्था में प्रवेश करती है।
एक सूत्र ने कहा ‘प्रापर्टी मार्केट का नियमन करना ही पड़ेगा, वरना इस तरह तो लाखों की जाली मुद्रा हमारी आधिकारिक अर्थव्यवस्था में शामिल होती रहेगी।’ एक अधिकारी ने कहा कि बैंकों और मुद्रा भंडारों की अचानक जांच होती रहना चाहिए। साथ ही जाली मुद्रा बरामद होने पर इसके जिम्मेदार लोगों को पकड़ने की मुहिम सख्ती से चलानी होगी। राज्य सरकारों को भी धन संबंधी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कुछ व्यवस्था बनानी चाहिए।