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धनी देश पी रहें है विकासशील देशों के हिस्से का पानी

स्वीडन /नई दिल्ली.विकसित ओर विकासशील देशों के बीच पानी को लेकर भविष्य में राजनीति स्तर पर तनाव बढ़ सकता है। भले ही अभी इस प्रकार का टकराव सामने दिखाई नहीं देता हो लेकिन वर्ल्ड वाइड फॉर नेचर की ताजा रिपोर्ट तो इस तरफ स्प्ष्ठ सकेंत कर रहीं है कि इस वक्त दक्षिणी यूरोप में सुखे के जैसी स्थिति है और अधिंकास देश जो विकसित है वहां पानी की कमी है और अब वे जो पानी पी रहें है वह विकासशील देशों के हिस्से का माना जा सकता है।

वर्ल्ड वाइड फॉर नेचर की रिपोर्ट इस बात की ओर स्पष्ठ सकेंत करती है कि भले ही ये देश आर्थिक रुप से विकसित हो लेकिन यहां पानी की भारी किल्ल्त है जो किसी भी समय बहुत बड़ा सकंट बन सकती है । सिडनी और हयूस्टन जैसे शहरों में पानी के हालात तो बहुत ही बुरे है।

क्यों हो रहा है ऐसा

तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों का समुचित रखरखाव न होने के कारण जल सकंट की समस्या सामने आ रहीं है।

भारत भी चिंतित

विश्व की आबादी का एक बड़ा भाग भारत में निवास करता है और जिस प्रकार से हिमालय के ग्लेशियर जलवायु परिवर्तन के कारण पिगल रहें है उससे हमारी नदियों में जल की कमी होने की संभावना व्यक्त की जा रहीं है । भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी भविष्य में पैदा होने वाले जल सकंट पर १५ अगस्त को दिए अपने भाषण में व्यक्त की थी।

पानी के मुद्दे पर टकरा सकते है विकसित और विकाशील देश विकसित देशों में जिस तेजी से जलसकंट उत्पन्न हो रहा है और पानी के उपभोग की मांग और उपल्बधता को देखते हुए भविष्य में विकसित और विकासशाली देशों में राजनीतिक टकराव हो सकता है जैसा कि पिछले दिनों खाद्य पदार्थो की कीमतों के बढ़ने हुआ था।

अमेरिका ने भारत सहित कुछ विकाशील देशों पर टिप्पणी की थी की वे ज्यादा उपभोग कर रहें है जिसके कारण विकसित देशों में भी इसका असर पड़ रहा है। इस पर भारत ने कड़ी आपत्ति व्यक्त की थी।

भविष्य में जिस तरह से आबादी का अनुपात बढ़ रहा है और खाद़य पदार्थो के उत्पादन और उपल्बध जल के वितरण के मुद़दे पर विकसित और विकासशील देशों के बीच राजनीतिक स्तर पर टकराव हो सकता है।





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