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विज्ञापन की आधी दुनिया

आज के विज्ञापनों में भारतीय नारी स्वतंत्र और आत्मनिर्भर नजर आ रही है। मां-बेटी, पति-पत्नी और मां-बेटे के रिश्तों से जुड़े ढेरों मुद्दों को विज्ञापनों के जरिए भुनाया गया है। किसी समय में गिने-चुने मामलों में नजर आने वाली महिलाएं आज मोबाइल फोन, कार, दोपहिया वाहन, पेन किलर और यहां तक कि पुरुषों से जुड़े उत्पादों के विज्ञापनों में भी नजर आ रही हैं।

इन विज्ञापनों ने सिर्फ महिलाओं की छवि को ही नए आयाम नहीं दिए, बल्कि यह भी स्थापित किया है बदलते दौर में महिलाओं के पास अवसरों की कमी नहीं है। इन विज्ञापनों ने कुछ फीमेल एड फिल्म मेकर्स को भी अग्रिम पंक्ति में ला खड़ा किया है। ऐसे में सेकेंड सेक्स को घर, समाज और दफ्तर में मजबूत हालात में खड़ा करने वाले कुछ विज्ञापनों पर एक नजर..

खरीदारी में ही समझदारी सर्फ का विज्ञापन

इस केटेगरी में काफी समय पहले आया सर्फ का विज्ञापन आप में से कई लोग भूले नहीं होंगे। इसमें नजर आईं ललिता जी और उनके ‘भाई साहब..’ वाले डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर हैं। एड फिल्म मेकर एलीक पद्मसी का ये ब्रेन चाइल्ड घरेलू जिम्मेदारी के मामले में स्त्री की समझदारी को जरा अलग तरीके से बयां कर रहा है। जानकार मानते हैं कि इस विज्ञापन ने उस वक्त निरमा पाउडर के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा तैयार की थी। आज भी घरेलू उत्पादों से जुड़े कई विज्ञापन इसी लकीर पर चलते नजर आते हैं। संभवत: इसीलिए मध्यमवर्गीय परिवार की मानसिकता को दर्शाते इस विज्ञापन को क्लासिक का दर्जा हासिल है।

यॉर सेकंड चांस इंडिका वीटू जीटा

अपनी ख्वाहिशों को खुलकर जाहिर करना और वक्त के साथ चलना इस विज्ञापन की थीम है। इसमें खिलंदड स्वभाव की चार लड़कियां सैर पर निकली हैं। रास्ते में एक खूबसूरत नौजवान को देखकर वे उसका साथ चाहती हैं, लेकिन लड़का अपनी बेवकूफी जाहिर करके दूसरे लड़के की तलाश के लिए बीच कैफे जाने की सलाह देता है। लड़कियां हाथ आए मौके को कैश न कर पा रहे लड़के से अचंभित होकर आगे बढ़ जाती हैं। विज्ञापन में बताया गया है कि जिंदगी आपको दो ही मौके देती है, लड़कियों वाला पहला मौका तो हाथ से गया लेकिन इंडिका जीटा न खरीदते हुए दूसरा हाथ से न जाने दें। इतने मौकों के बाद भी अगर आप नहीं चेतते तो..‘यू आर गॉन टू बी डंब।’ संदेश साफ है कि अब मौज-मस्ती पर सिर्फ लड़कों का ही अधिकार नहीं है।

ये तो बड़ा टॉइंग है अमूल माचो

अमूल माचो सीरीज का पिछला विज्ञापन अपने बिंदासपन के चलते बैन कर दिया गया था। ऐसे में इस श्रंखला का नया विज्ञापन प्लान करते वक्त अतिरिक्त सतर्कता बरती गई। इस विज्ञापन के जरिए महिलाओं की भावनाओं को मुखरता से जाहिर किया गया है, जो बदलते समय का परिचायक है। आप खुद इस बात को गहराई से महसूस कर सकते हैं कि एक समय महिलाएं अपनी शादी, पसंद के लड़के यहां तक कि कपड़ों की पसंद को लेकर भी संकोची थीं, लेकिन अब वे खुलकर सामने आने लगी हैं।

सामाजिक जिम्मेदारी और महिलाएं सर्फ एक्सेल क्विक वॉश

पानी आज हर व्यक्ति की जरूरत है। इस नब्ज को पकड़कर सर्फ के एड मेकर ने दो बाल्टी पानी बचाने की मुहिम चलाई। इसमें कई महिलाओं और पुरुषों को घर में दो बाल्टी पानी बचाते दिखाया गया है। संदेश साफ है कि अगर आपके पास सर्फ एक्सेल क्विक वॉश है तो आप कपड़े धोते समय दो बाल्टी पानी बचा सकते हैं। यानी महिलाएं समाज और देश के हित में भी बढ़-चढ़कर आगे बढ़ रही हैं। शबाना आजमी की सकारात्मक सोच कि अगर हर महिला दो बाल्टी पानी बचाएगी तो पूरे हिंदुस्तान में कितना पानी बचेगा, सही लगती है।

जरा हटके विज्ञापन-वर्जिन मोबाइल

वर्जिन मोबाइल युवाओं को ध्यान में रखते हुए लांच किया गया, इसकी थीम जरा हटकर है। इसमें माता-पिता सोच रहे हैं कि उनकी बेटी की लड़कों में कोई दिलचस्पी नहीं है। असलियत में ऐसा नहीं है और लड़की अपने बॉयफ्रेंड के साथ गोवा जाने के लिए इस तरह का नाटक कर रही है। माता-पिता उसे लड़कों के साथ वक्त बिताने की कोशिश के तहत गोवा जाने के लिए कहते हैं और बेटी का काम बन जाता है। संदेश साफ है कि लड़की ने किस तरह हालात अपने पक्ष में करने के लिए साम, दाम, दंड और भेद से काम लिया है। यह भी बदलते वक्त का सूचक है।

इंवेस्टमेंट की बागडोर आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल का इंश्योरेंस वाला विज्ञापन पूरी तरह भारतीय मध्यमवर्ग की मानसिकता को दर्शाता है। इसमें ऑफिस के लिए निकलते पति से इंश्योरेंस पेपर साइन करने का कहने वाली पत्नी पूरी तरह आत्मविश्वास से भरपूर है। पति का ‘मेरे बिना जी पाओगी’ का जवाब जितना अच्छा है, उतना ही अचूक निशाना पत्नी ने ऐसा करने पर बच्चे का भविष्य सुरक्षित होने, बेफिक्र रिटायर्ड लाइफ जीने और सुकून की जिंदगी पाने के बाद लंबी आयु जीने का जवाब देकर लगाया। यह विज्ञापन बताता है कि आज की महिला घर और परिवार की सुरक्षा समेत इंवेस्टमेंट के मामले में भी खासी जागरूक है, जबकि पहले ये काम सिर्फ पुरुषों का ही माना जाता था। पेपर साइन होने के बाद ‘जीते रहो’ ने सोने पर सुहागा का काम किया है।

बेटी बड़ी हो गई एचडीएफसी स्टेंडर्ड लाइफ

अभिभावकों को बच्चों को नई या पहली गाड़ी दिलवाते हुए तो हमने कई बार देखा है, लेकिन एचडीएफसी के इस विज्ञापन में पुरानी कार को सुधार रहे पापा को बेटी ने बड़ी कार खरीदने की सलाह दी। पिता का जवाब-एक्सट्रा पैसे डैड देगा क्या और बेटी का त्वरित जवाब-डैड की बेटी देगी, अपने आप में संपूर्ण बात कह गया। बेटी के आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर होने का मैसेज भी सामने आया। पंच लाइन ‘जिम्मेदारी निभाओ, आज भी, कल भी’ महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का पहलू सामने लाता है। साथ ही यह विज्ञापन यह संदेश भी देता है कि आज के दौर में अभिभावक की जिम्मेदारी सिर्फ बेटे ही नहीं, बल्कि बेटियां भी उठा सकती हैं यानी लड़का-लड़की एक समान, का संदेश भी इसमें निहित है।





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