नई दिल्ली.देश के मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला ने जम्मू-कश्मीर की मौजूदा स्थिति को तबाही की कगार पर बताया है। इसके पीछे जम्मू-कश्मीर के लोगों की भावनाओं को नजरअंदाज करना एक प्रमुख कारण है, जिसके परिणामस्वरूप अमरनाथ भूमि विवाद ने इस कदर व्यापक रूप ले लिया।
‘भास्कर-डीएनए’से एक विशेष बातचीत में हबीबुल्ला ने कहा बाहर से ऐसा लग रहा था कि घाटी में हालात सामान्य हैं, लेकिन अंदर लोगों में असंतोष की आग सुलग रही थी। 1991 से 1993 तक जम्मू-कश्मीर के संभागायुक्त रहे हबीबुल्ला ने कहा 96 और 2002 में विधानसभा चुनावों से लोगों को उनकी बेहतरी की दिशा में फैसला लेने का अधिकार नहीं मिल सका। .
भूमि हस्तांतरण जरूरी नहीं था : एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘अमरनाथ श्राइन बोर्ड को भूमि हस्तांतरित किए बगैर भी सरकार अमरनाथ यात्रियों के लिए इंतजाम का काम जारी रख सकती थी।’ घाटी के नेताओं की इन आलोचनाओं पर कि अमरनाथ यात्रा का जम्मू से कोई लेना-देना नहीं है, हबीबुल्ला ने कहा कि यह यात्रा राज्य की धर्मनिरपेक्ष परंपराओं का प्रतीक है, इसलिए इन आरोपों में कोई सच्चई नहीं है।
असुरक्षा की भावना :
1994 में चरारे शरीफ में घुसे आतंकवादियों के साथ सरकार की वार्ता प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाने वाले हबीबुल्ला ने कहा कि कश्मीर घाटी के लोग खुद को घिरा हुआ महसूस कर रहे हैं। वहां दवाओं की कमी है। लोगों में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है और यही इस आंदोलन के प्रति उनके सख्त रवैये का प्रमुख कारण है।