News
International International इस्लामाबाद.
पाक राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने आज राष्ट्र को संबोधित करने के साथ ही अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है । उन्होंने अपने संबोधन में सेना का शुक्रिया अदा किया है और बहुत ही भावनात्मक अंदाज में अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए कहा है कि वे नहीं चाहते कि इस टकराव में राष्ट्रपति पद की गरिमा को क्षति पहुचें।
देश रहा सर्वोपरी
पाक राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ ने कहा है कि उनके लिए राष्ट्रहित हमेशा सर्वोपरि रहा है और उन्होंने हमेशा देश के उत्थान और अवा्म की भलाई के लिए फैसले लिए है। अपने संबोधन में भावुकता भरे अंदाज में जनरल ने कहा है कि उन्हें महाभियोग की चिंता नहीं है ओर ना ही जीत या हार की वे बस देशहित में अपने पद से इस्तीफा दे रहे है और देश को अवा्म के हाथों में सौंप रहे है।
सबसे पहले पाकिस्तान की याद दिलाई
सबसे पहले पाकिस्तान नारे को याद करते हुए मुशर्रफ ने कहा कि उन्होंने पाकिस्तान की भलाई के लिए हमेशा कार्य किया है और अपने कार्यकाल में विश्व स्तर पर पाकिस्तान को एक नई पहचान और रुतबा दिलाया है।
कुछ लोग झूठ को सच साबित करना चाहते है
जनरल ने अपने विरोधियों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा है कि कुछ लोग उनकीं नीतियों का विरोध कर रहे है और गलत सिद्ध करने का प्रयास कर रहे है दरअसल ये वे लोग है जो बेबुनियाद आरोप लगा रहे है और झूठ को सच साबित करने का प्रयास कर रहे है।
दावे:
-2001 में भारत के साथ तनाव और दस माह तक युद्ध के बादल मंडराने के दौरान देश और जनता को महफूज रखा।
-पाकिस्तान को आतंकी देश का ठप्पा लगने से बचाया।
-देश का जीडीपी की औसत दर 7 प्रतिशत रही।
-गरीबी 34 प्रतिशत से 24 प्रतिशत पर लाए।
-डालर के मुकाबले रुपए की विनिमय दर 60 रु. प्रति डालर पर स्थिर रखी।
-17 अरब डालर का विदेशी मुद्रा भंडार रखा।
चुनाव के बाद यह स्थिति बताई
-विदेशी निवेशकों ने धन लगाना रोका।-आटा, चावल, दाल, चीनी के दाम दोगुने होने से जनता परेशान
खुद पर लगे आरोपों के बारे में उन्होंने कहा,
1. देश में प्रांतीय और नेशनल असेंबली के स्वतंत्र, निष्पक्ष व पारदर्शी चुनाव करवाए, जिनमें तमाम लोगों ने हिस्सा लिया।
2. मुझे समस्या समझा गया, हल नहीं।
3. क्या ये लोग मेरे संवैधानिक हकों से खौफजदा हैं?
4. क्या ये अपनी मौजूदा और भावी गलतियां छिपाना चाहते है?
5. महाभियोग लगाना पार्लियामेंट का हक है, तो मुझे उसका जवाब देने का भी हक है।
6. मेरे खिलाफ कोई आरोप साबित नहीं हो सकता क्योंकि मैंने जो किया देश के लिए किया, गरीबों का ध्यान रखा।
7. ये अवाम को धोखा देने की कोशिश है, इससे पाकिस्तान को नुकसान पहुंचेगा।
8. हर फैसला, भले ही वो खतरनाक हो या कैसा भी, पूरे विश्वास के साथ किया, सेना, सिविल सर्वेट्स, राजनेताओं व उलेमाओं को विश्वास में लेकर किया।
महाभियोग पर उठाए सवाल
1. महाभियोग के मुद्दे का देश पर क्या असर होगा?
2. क्या देश इससे उत्पन्न स्थिति व अस्थिरता बर्दाश्त कर पाएगा?
3. क्या ये सही होगा कि राष्ट्रपति के दफ्तर को महाभियोग से गुजारा जाए?
4. निजी बदले की भावना से नहीं संजीदगी से सोचने का समय है।
5. महाभियोग में हार से राष्ट्रपति व सरकार तथा न्यापालिका के संबंधों में कड़वाहट आ सकती है।
6. यह डर है कि कहीं इस मामले में फौज भी न शामिल हो जाए।
7. संसद को खरीद-फरोख्त से बचाने और दोस्तों को मुश्किल में डालने की बात दिमाग में है।
वर्जन
‘पाकिस्तान मेरा इश्क है, इसके लिए जान हाजिर है, 44 साल जान दांव पर लगा कर इसकी हिफाजत की है और करता रहूंगा।’
---------------
‘महाभियोग में मैं जीतूं या हारूं, मुल्क और कौम की हार होगी और राष्ट्रपति पद की गरिमा को ठेस पहुंचेगी। लिहाजा मैंने मुल्क और लोकतंत्र की बेहतरी के लिए यह कदम उठाया है।’
-------------
‘मैंने अपने कानूनी सलाहकारों, सहयोगियों और करीबी समर्थकों से सलाह मशविरे के बाद फैसला किया है कि मुझे महाभियोग की चिंता नहीं करनी चाहिए।’
-----------------
‘पाकिस्तान जब आतंकी राष्ट्र घोषित होने ही वाला था, मैंने पद संभाला, आज दुनिया हमारी बात सुनती है, आतंकवाद के खिलाफ हमारी मदद लेती है।’
------------
‘मैं भी इंसान हूं, कोताहियां हुई होंगी। उम्मीद है कौम दरगुजर करेगी, मेरी नीयत हमेशा साफ रही है।’