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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़.कुदरत से लड़कर आज तक कोई जीता नहीं है, सुशील की क्या बिसात.. लेकिन जीवन के लिए सुशील ने तीन घंटे तक संघर्ष किया। इस हादसे में चौंकाने वाला तथ्य यह है कि चंडीगढ़ जैसे शहर में एक शख्स बह गया, किसी नदी-नाले में नहीं, बारिश के बाद पुल पर आए पानी के बहाव में। इसी जगह पर दो दिन पहले दो युवकों की बाइक बह गई थी। कुदरत के इस कहर और प्रशासन की लापरवाही ने इस बार मानसूनी सीज़न में सात लोगों की जान ले ली है।
दोपहर 3.20 बजे
धनास पुल के चारों तरफ लोग इकट्ठा हैं। सुशील पानी के तेज बहाव में फंसा है, पानी इतना ज्यादा है कि उसके सिर्फ हाथ नजर आ रहे हैं। लोगों ने एक पोल पर रस्सी बांध सुशील के पास फेंकी। सुशील ने रस्सी पकड़ी और अपने शरीर में बांध ली। रस्सी बांध कर सुशील कुछ ऊपर की तरफ आया, अब उसका चेहरा दिखने लगा है।
3.40 बजे
मौके पर पुलिस पहुंची और फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी। मौके पर हालात देख दोनों के हाथ-पांव फूल गए। पुलिस और फायर ब्रिगेड का कहना था कि पानी का बहाव बहुत तेज है, सुशील जहां फंसा है, हम वहां तक पहुंच नहीं सकते। उधर, सुशील लगातार हिम्मत दिखाते हुए आगे आने की कोशिश कर रहा है और रस्सी के सहारे सैलाब से जूझ रहा है। फायर ब्रिगेड ने हाईड्रोलिक लैडर के लिए कॉल किया।
4.30 बजे
सुशील की आंखों में आस बरकरार है, वह लगातार तेज बहाव को सहते हुए बार-बार हाथ उठाकर मदद मांग रहा है, लेकिन किसी की आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं हो रही है। एक घंटे बाद, हाईड्रोलिक फायर टेंडर मौके पर पहुंचा, लेकिन 15 मिनट तक कुछ नहीं किया। फायर विभाग के कर्मचारियों से सुशील की उम्मीद बरकरार है..
4.45 बजे
फायर कर्मियों ने पुलिस से कहा, पहले बिजली विभाग से संपर्क कर ऊपर से जा रही तारों में करंट बंद करवाओ, उसके बाद ही कुछ कर सकेंगे। सुशील अब भी पानी की तेज लहरों से जूझ रहा है, उसे बचाने के लिए अभी तक कोई आगे नहीं आया है। बिजली की तारों में करंट बंद करवाया गया, रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू..
लापरवाही से चली गई जान..
हाइड्रोलिक लैडर पर फायर कर्मी सुशील तक पहुंचे। सुशील के करीब पहुंचकर उसे एक रस्सी फेंकी। सुशील ने रस्सी पकड़ ली और ऊपर चढ़ने लगा। सुशील करीब-करीब लैडर तक पहुंच गया है, उधर लोग खुशी में ताली बजा रहे हैं.. तभी फायर कर्मियों ने सुशील के शरीर पर बंधी हुई रस्सी पोल से खुलवा दी। बस फिर क्या था, तेज बहाव में सुशील फिर पानी में ओझल हो गया। लेकिन किनारे खड़ी भीड़ ने समझदारी दिखाई और रस्सी दोबारा पोल से बांध दी।
हाईड्रोलिक लैडर पर फायर कर्मी हक्के-बक्के खड़े रहे और वापसी की तैयारी करने लगे। तभी भीड़ में से सुरिंदर लोहे की खूंटी ले आया और फायर कर्मियों को समझाया कि रस्सी अभी भी सुशील के साथ बंधी होगी, खूंटी डालकर रस्सी खींचने की कोशिश करो। 15 मिनट बाद फायर कर्मियों ने यह कोशिश की और रस्सी को खूंटी से खींचा। शाम ६.१५ बजे सुशील को बाहर निकाला गया। सुशील की सांसें बाकी थीं, लेकिन फायर कर्मी समझ रहे थे कि उसकी मौत हो चुकी है, इसलिए उसे उठाकर लाने के बजाय लटकाकर लाए। पुलिस सुशील को पीजीआई ले गई, जहां डॉक्टरों ने उसे आर्टिफिशियल हार्टबीट जनरेट कर बचाने की कोशिश की, लेकिन 7.20 बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया।